ताज़ा खबर
 

एम्स में पूर्व सीवीओ का दावा- सीवीसी ने बंद किए एम्स के कई भ्रष्टाचार के मामले

केंद्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी के खिलाफ जांच की मांग कर रहे संजीव ने अपने दावे के समर्थन में करीब 1,000 पन्नों के दस्तावेज हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय को भेजे हैं।

Author नई दिल्ली | November 22, 2017 4:12 AM
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली

भ्रष्टाचार के मामलों के खुलासे के लिए रमन मैगसायसाय अवॉर्ड से नवाजे जा चुके आइएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुए भ्रष्टाचार के कई ऐसे मामले बंद कर दिए जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर शामिल थे।  केंद्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी के खिलाफ जांच की मांग कर रहे संजीव ने अपने दावे के समर्थन में करीब 1,000 पन्नों के दस्तावेज हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय को भेजे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति सचिवालय से सात मामलों का ब्योरा साझा किया है। इन सात मामलों में एक उस वक्त का है जब एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद पर संजीव की तैनाती के दौरान उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा था। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सीवीसी की इकाई के तौर पर संजीव ने जुलाई 2012 से अगस्त 2014 तक एम्स में सीवीओ के रूप में सेवाएं दी थीं। वे अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सीबीआइ के संज्ञान में लाए। गहन जांच के बाद सीबीआइ ने सीवीसी की ओर से बंद किए जा चुके चार मामलों में विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की और उनमें अधिकारियों और वरिष्ठ शिक्षकों को नामजद किया । संजीव की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के जरिए हासिल किए गए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है। सतर्कता नियमावली के मुताबिक, आपराधिक पहलू वाले भ्रष्टाचार के मामले संगठन के सीवीओ की ओर से पहले सीबीआइ को भेजे जाते हैं। विभागीय कार्रवाई के मामलों पर सीवीसी के निर्देश के आधार पर कार्रवाई की जाती है । सीवीसी ने अपने जवाब में कहा कि हर मामले में रिपोर्ट का परीक्षण किया गया और उचित स्तर पर इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया गया ।

अपनी प्रतिक्रिया में सीवीसी ने कहा, ऐसी रिपोर्ट गोपनीय दस्तावेज होती हैं और आयोग की ओर से सलाह दिए जाते वक्त उचित अधिकारी की राय पर गौर किया जाता है। सीवीसी ने कहा कि चूंकि हर मामले में अन्य अधिकारी शामिल हैं, इसलिए निजता के अधिकारों और विभिन्न जांच एजंसियों की रिपोर्टों को लेकर गोपनीयता के मद्देनजर ब्योरा देना उचित नहीं समझा गया। संजीव ने राष्ट्रपति सचिवालय को की गई शिकायत के साथ भ्रष्टाचार के इन सभी मामलों पर आरटीआई अर्जियों के जरिए हासिल किए गए दस्तावेजों का एक सेट नत्थी किया है।  पहला मामला एम्स में 7,000 करोड़ रुपए के आधारभूत संरचना कार्य में कथित भ्रष्टाचार और परियोजना के पर्यवेक्षण के लिए सितंबर 2012 में एम्स की इंजीनियरिंग शाखा के प्रमुख के तौर पर बीएस आनंद को मिले कथित अवैध सेवा विस्तार से जुड़ा है। सीबीआइ ने जनवरी 2014 में आनंद और एम्स के पूर्व उपनिदेशक और आइएएस अधिकारी विनीत चौधरी के खिलाफ केस दर्ज किया था।

दस्तावेजों के मुताबिक, वित्तीय नुकसान, संपत्ति की खरीद और अन्य मुद्दों के बाबत केस दर्ज किया गया था।  दस्तावेजों के अनुसार, दिसंबर 2014 में स्वास्थ्य मंत्रालय में सौंपी गई रिपोर्ट में सीबीआइ ने चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। हालांकि सीवीसी ने कार्मिक ं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की बजाय स्वास्थ्य मंत्रालय में राज्य मंत्री की सिफारिश पर जुलाई 2016 में इस मामले को बंद करने का फैसला किया। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आइएएस अधिकारियों के मामले में डीओपीटी अनुशासनिक प्राधिकारी होता है। एक अन्य मामला कीटाणुनाशक और धुएं का छिड़काव करने वाले उपकरणों की खरीद से जुड़ा है।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App