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कोरोना, ऑक्सिजन संकटः आप अंधे हो सकते हैं, हम नहीं…कैसे इतने असंवेदनशील हो सकते हैं?- मोदी सरकार को दिल्ली HC की फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने तीखे लहजे में कहा कि आप अंधे हो सकते हैं, लेकिन हम नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मोदी सरकार इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है, ये बात समझ से परे है।

oxygen, new delhi, aap, bjpऑक्सीजन संकट को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि जो ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न करेगा उसे लटका दिया जाएगा। (फोटो – पीटीआई)

कोरोना महामारी के बीच देश की राजधानी में बरकरार आक्सिजन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने तीखे लहजे में कहा कि आप अंधे हो सकते हैं, लेकिन हम नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मोदी सरकार इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है, ये बात समझ से परे है।

देशभर में जारी कोरोना वायरस की दूसरी खतरनाक लहर के बीच दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने ऑक्सिजन की कमी के मामले में केंद्र सरकार को एक बार फिर से फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र जिस तरह का असंवेदनशील रवैया दिखा रहा है वो लोगों की जान पर भारी पड़ सकता है। कोर्ट का कहना था कि वो इस बात को लेकर बेहद संवेदनशील है कि लोगों को तत्काल ऑक्सिजन मिले।

हाईकोर्ट पिछले कई दिनों से लगातार ऑक्सिजन की किल्लत पर सुनवाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने केंद्र को दिल्ली के हिस्से की 490 मैट्रिक टन ऑक्सिजन आज सप्लाई करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार आज दिल्ली को 490 मैट्रिक टन ऑक्सिजन की सप्लाई नहीं करती है तो इसे अवमानना की कार्रवाई करेंगे। लेकिन अभी तक हालात जस के तस हैं। दिल्ली सरकार की उस याचिका पर भी कोई फैसला नहीं हो सका है जिसमें सेना की मदद लेने की मांग की गई थी।

एक तरफ केंद्र कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा तो दूसरी तरफ दिल्ली में कोरोना से होने वाली मौतों का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। पहले जयपुर गोल्डन और फिर बत्रा अस्पताल में कई मरीजों की मौत ऑक्सिजन की कमी की वजह से हुई। आलम ये है कि दिल्ली के शमशानों में अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बच रही है। हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिव करके और नए शमशान बनाने की अनुमति मांगी गई है।

वकील स्निग्धा सिंह के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि अस्पतालों में बिस्तरों और जांच किट व ऑक्सिजन आपूर्ति जैसे अन्य सामान की भारी कमी के कारण दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इसके चलते शमशान घाट और कब्रिस्तान भर गए हैं और शवों का अंतिम संस्कार करने में काफी वक्त लग रहा है। शमशान घाट और कब्रिस्तानों की संख्या अस्थायी तौर पर बढ़ाने की आवश्यकता है।
इसमें किसी भी पार्क, मैदान, खुले स्थान, स्टेडियम या ऐसे अन्य किसी स्थान को शवदाहगृह बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।

चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने केंद्र, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नगर निकायों को नोटिस जारी किए हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता प्रत्यूष प्रसन्न द्वारा उपलब्ध आंकड़ों पर विचार करने के बाद प्रतिवादी प्राधिकारियों को इन पर अपने जवाब देने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाली लकड़ियों की कमी के चलते दो नगर निगमों ने उपले से शव जलाने की बात कही है।

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