दिल्ली के सरकारी अस्पताल में फैला कोरोना? डॉक्टरों की कमी, बैरंग लौट रहे मरीज़

दिल्ली के श्री दादादेव मातृ एवं शिशु अस्पताल में इन दिनों लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जिस ऑनलाइन बुकिंग ऐप को लॉन्च किए एक साल हो गया है, वह आज बेकार साबित हो रहा है।

दादादेव अस्पताल में मरीजों की कतार।

दिल्ली में सरकारी अस्पतालों और मरीजों की सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन इन दिनों एक बड़े सरकारी अस्पताल में लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली के डाबड़ी स्थित दादादेव मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में इन दिनों डॉक्टरों की कमी है। इसके चलते बड़ी संख्या में मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस अस्पताल में ऑनलाइन ओपीडी अपॉइंटमेंट के लिए ऐप भी लॉन्च किया था लेकिन यह भी मरीजों के लिए बेकार साबित हो रहा है।

डॉक्टरों को हुआ कोरोना?
पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अस्पताल में ओपीडी अपॉइंटमेंट के लिए एक ऐप लॉन्च किया था। दावा किया गया था कि इससे गर्भवती महिलाओं को काफी फायदा मिलेगा और उन्हें लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। हालांकि यह ऐप एक साल बाद भी ठीक से शुरू नहीं हो पाया। जब इसे शुरू भी किया गया तो 15 दिन के अंदर ही इसपर एक खास नोटिफिकेशन दिखाया जाने लगा। अपॉइंटमेंट बुक करने की कोशिश करते ही इसमें लिखकर आता है, ‘कोविड इन्फेक्शन बढ़ने की वजह से कुछ सेवाओं को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है।’

बता दें कि इस अस्पताल में अधिकतर गर्भवती महिलाएं आती हैं। दूर-दूर से लोग आते हैं और उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अस्पताल को लेकर कई तरह के वादे किए थे जो कि आज खोखले साबित हो रहे हैं। कहा गया था कि जब किसी को ओपीडी में दिखाना होगा तो ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेना होगा और अगर 11 बजे का समय मिला है तो केवल आधा घंटा पहले आना होगा।

सुबह 5 बजे से ही लग जाती है कतार
अस्पताल में दिखाने के लिए सुबह 5 बजे से ही कतार लग जाती है। पहले तो मरीजों को अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाती है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं अस्पताल के बाहर ही सड़क पर इंतजार करती हैं। पास में ही कूड़ाघर भी बना हुआ है। जब गेट खुलता है तो केवल 80 लोगों को टोकन दिया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।

टांग दिए गए पुराने पोस्टर
कोरोना काल में दिक्कत होने की वजह से जिन पोस्टरों को लगाया गया था उन्हें एक बार फिर टांग दिया गया है। इसपर लिखा है कि कोरोना फैलने की वजह से डॉक्टरों की संख्या अपर्याप्त है और ऐसे में सिर्फ नौवें महीने की गर्भवती महिलाओं को ही अपॉइंटमेंट दिया जाएगा। कर्मचारियों से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह स्थिति लगभग एक महीने बनी रह सकती है। किसी ने इसकी स्पष्ट नहीं बताई। प्रशासन से संपर्क किया गया तो बताया गया कि इस समय डॉक्टरों की संख्या कम है। हालांकि इसकी कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई।

अस्पताल में डॉक्टर का परामर्श लेने पहुंचीं शिवा ने बताया कि वह लगातार तीन दिन से कोशिश कर रही हैं लेकिन उनको अपॉइंटमेंट नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उनके पति सुबह 5.30 बजे से ही लाइन में थे, बावजूद इसके उनको टोकन नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि शुरू से ही वह यहीं दिखा रही थीं। पहले 200 लोगों को टोकन दिया जाता था लेकिन अब केवल 80 मरीजों को ही एक दिन में देखा जा रहा है।

एक गर्भवती महिला आरती ने कहा कि उन्होंने कई बार ऑनलाइन अपॉइनमेंट लेने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि अस्पताल की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती है कि इस असुविधा की क्या वजह है।

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