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नोटबंदी का विरोध: कांग्रेस आक्रामक तो जुबानी जंग में उलझी आप

नोटबंदी संकट के खिलाफ दिल्ली में कांग्रेस का अभियान बढ़ता जा रहा है।

नोटबंदी से परेशान लोग बैंक के बाहर खड़े हुए।

नोटबंदी संकट के खिलाफ दिल्ली में कांग्रेस का अभियान बढ़ता जा रहा है। वहीं प्रचंड बहुमत से दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी (आप) जुबानी विरोध से आगे बढ़ती हुई नहीं दिख रही है।  आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजार और पांच सौ के नोट बंद करने की घोषणा की थी। इससे आमजन को हुई भारी परेशानी के खिलाफ कांग्रेस और आप समेत अमूमन सभी विपक्षी दलों ने हर स्तर पर विरोध करना शुरू कर दिया। बंगाल के बाहर जनाधार न होने पर वहीं की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली, लखनऊ और पटना में भी आंदोलन किया। आप ने भी शुरू में ममता बनर्जी के साथ दिल्ली की आजादपुर मंडी में जनसभा की। कांग्रेस तो संसद के भीतर और बाहर देश भर में विरोध में चल रहे कार्यक्रमों की अगुआई कर रही है। अजय माकन की अगुआई में दिल्ली कांग्रेस लगातार नोटबंदी का विरोध और उससे हो रही परेशानियों को मुद्दा बना रही है। पहले सभी 70 विधानसभाओं में आंदोलन चले अब पूरी दिल्ली के 280 वार्डों में 13 और 14 दिसंबर को नोटबंदी पर चर्चा करवा रहे हैं।

आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरह दिल्ली में बैंकों के बाहर पैसा बदलने के लिए लाइन में लगे लोगों के बीच एक बार ममता बनर्जी के साथ और दो स्थानों पर अकेले जाकर सहानुभूति लेने की कोशिश की। लेकिन आजादपुर मंडी की सभा की तरह हर जगह लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि भाजपा ने विरोध करवाया। 15 नवंबर को विधानसभा की विशेष बैठक में जरूरतमंद लोगों को मदद देने के आदेश दिए। बावजूद इसके वे बाद में देश भर का दौरा करने लगे। लेकिन उनकी पार्टी ने दिल्ली में कोई बड़ा अभियान नोटबंदी पर नहीं लिया। आप के नेता गाहे-बगाहे बयान देकर विरोध करने की खानापूर्ति कर रहे हैं। एक भी बड़ा कार्यक्रम आप ने पूरी दिल्ली में नोटबंदी के खिलाफ या सरकार बनने पर किसी भी मुद्दे पर दिल्ली भर में नहीं किया है।

भाजपा के नेता तो शुरू में चुप रहे लेकिन प्रधानमंत्री के लगातार घिरने पर वे पहले तो बैंक और एटीएम की लाइन में लगे लोगों को अन्य दलों और कुछ स्वयंसेवी संगठनों की तरह चाय-पानी देना शुरू किया। हालात और खराब होने पर अपने समर्थकों के इलाके में जनजागरण अभियान चलाया और प्रधानमंत्री की धोषणा के बाद नकदीरहित लेनदेन का गुर सिखाने का दावा कर रहे हैं। इसी बीच सतीश उपाध्याय की जगह पर मनोज तिवारी प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। अपनी सक्रियता दिखाने के लिए वे नकदीरहित अभियान में जुट गए। यह अलग बात है कि वे जहां भी गए लोगों ने उनसे नकदी न होने का ही रोना रोया।दिल्ली में वैसे तो देश में सक्रिय अमूनन हर दल की शाखा है, लेकिन ज्यादा जनाधार वाले तीन दल-आप, भाजपा और कांग्रेस ही हैं। लगातार दो विधानसभा चुनाव में पराजित होने और अपना वोट बैंक आप के हाथों गंवाने के बाद कांग्रेस का सबसे बुरा हाल था। मई में हुए नगर निगमों के 13 सीटों के उपचुनाव हैं जिसमें कांग्रेस को अपने परंपरागत मतदाताओं के बूते पांच सीटें मिलीं। इस छोटे से चुनाव ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया। तब से दिल्ली में कांग्रेस की सक्रियता ज्यादा बढ़ गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का दावा है कि जब भी गलत तरीके से संसदीय सचिव बनाए गए आप के 21 विधायकों की सदस्यता खत्म करके उपचुनाव होंगे तब आप का उन सीटों पर सफाया हो जाएगा। वैसे अभी सबसे बड़ा मुद्दा नोटबंदी से होने वाली परेशानी है। इसने पूरे देश को तबाह कर दिया है। दिल्ली से प्रवासी मजदूरों का भारी पलायन हो रहा है। इसे रोकने के लिए माकन ने सरकार से बेकारी भत्ता देने की मांग की है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे हैं। दावा करते हैं कि इस मसमले को लेकर दिल्ली के हर घर तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। इसके लिए व्यापक तैयारी कर ली गई है। दो दिन तक चलने वाली नोटबंदी पर चर्चा में दिल्ली की जनता बड़ी तादाद में हिस्सी लेने वाली है। नोटबंदी ने समाज के ज्यादातर लोगों को परेशान कर दिया है। कमजोर और निम्न मध्यमवर्ग की तो कमर ही टूट गई है।

 

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