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हिंदी सम्मेलन पर संघ की छाया

मॉरीशस में 18 अगस्त से शुरू होने वाले 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन पर संघ की छाया पड़ती दिखाई दे रही है। भारत की ओर से भेजे जा रहे प्रतिनिधियों की सूची में अफसरशाही और राजनीतिक तौर पर प्रभावी समूहों ने खूब दखल दिया है।

Author नई दिल्ली, 14 अगस्त। | August 15, 2018 6:19 AM
प्रतीकात्मक चित्र

मॉरीशस में 18 अगस्त से शुरू होने वाले 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन पर संघ की छाया पड़ती दिखाई दे रही है। भारत की ओर से भेजे जा रहे प्रतिनिधियों की सूची में अफसरशाही और राजनीतिक तौर पर प्रभावी समूहों ने खूब दखल दिया है। परामर्शदाता समिति एवं चयन समिति के द्वारा तय प्रतिनिधियों की सूची में जोड़-घटाव का आलम यह रहा कि मॉरीशस की यात्रा के 24 घंटे पहले तक विदेश मंत्रालय पूर्ण सूची जारी नहीं कर पाया। आखिरी मौके तक प्रतिनिधियों की सूची में कांट-छांट की बात कई स्तर पर अधिकारियों ने स्वीकार की है।

सम्मेलन के लिए हर राज्य सरकार से विदेश मंत्रालय ने दो नाम मंगाए थे। इनमें से कुछ नाम अधिकारियों ने तय किए। ऐसे नामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के सुझाव पर जो दो नाम प्रतिनिधियों की सूची में शामिल किए गए वे हैं राजनांदगांव के पूर्व सांसद प्रदीप गांधी और राज्य की हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा। दोनों संघ परिवार से जुड़े हैं और प्रदीप गांधी तो संसद में नोट लेकर सवाल पूछने के बहुचर्चित मामले में बर्खास्त किए जा चुके हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर एटा के कवि ध्रुवेंद्र भदौरिया का नाम शामिल किया गया है, जो प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करते हैं और बजरंग दल के पदाधिकारी हैं।

हरियाणा की संघ परिवार से जुड़ी बताई जा रही संस्था मातृभूमि सेवा मिशन के एक शिष्टमंडल को सरकार के खर्चे पर जगह मिली है। विदेश मंत्रालय ने परामर्शदाता समिति के सुझावों पर गौर करने के लिए एक चयन समिति बनाई थी, जिसमें एक नाम पत्रकार मनोहर पुरी का है, जो हिंदुस्तान समाचार में संसद के संवाददाता थे और केंद्र की राजग सरकार ने उन्हें बाली में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का संयोजक तैनात किया है। इन नामों के अलावा लेखक, साहित्यकार और पत्रकारों को जगह मिली है, जिनमें से अधिकतर को मौजूदा सरकार ने विभिन्न कमेटियों और संस्थाओं में जगह दी है।

प्रमुख समितियों और जाने-माने विद्वानों के अलावा राज्यों से भेजे जा रहे और अफसरों द्वारा चुने गए नामों को शामिल करने को लेकर खबर लिखे जाने तक कांट-छांट की प्रक्रिया चलती रही। सम्मेलन से जुड़े दस्तावेजों के डिजीटलीकरण का काम कर रहे नेशनल इंफॉरमेटिक्स सेंटर (एनआइसी) के एक अधिकारी ने माना कि गड़बड़ी हुई है। इसी कारण देर रात तक प्रतिनिधियों की अंतिम सूची वेबसाइट पर नहीं डाली जा सकी। संयुक्त सचिव अशोक कुमार ने बताया कि बाकी दस्तावेज डाल दिए गए हैं। प्रतिनिधियों को लेकर कई औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। उसके बाद सूची जारी कर दी जाएगी।

संतुलन पर सवाल

सम्मेलन की तैयारियों को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश मंत्रालय की सचिव प्रीति सरन ने पिछले दिनों पोर्ट लुई का दौरा कर मॉरीशस में की जा रही तैयारियां देखीं। देश में भी विभिन्न कमेटियों के साथ उनकी सक्रियता दिखी। लेकिन लेखक-साहित्यकारों के एक वर्ग में विश्व हिंदी सम्मेलन की कवायद में संतुलन पर सवाल उठ रहे हैं। अतीत में तैयारियों से जुड़े कई नाम इस बार नहीं जा रहे। पुरुषोत्तम अग्रवाल ने तो विश्व हिंदी सम्मेलन को लेकर बात करने से ही मना कर दिया। कथाकार संजीव ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं कि इस बार सम्मेलन में कौन-कौन जा रहा है। फिर भी सरकार को संतुलन बनाकर चलना चाहिए।

परामर्शदाता एवं चयन समिति

तैयारियों के लिए विदेश मंत्रालय ने पांच लोगों की परामर्शदाता समिति गठित की थी, जिसमें कमल किशोर गोयनका, अशोक चक्रधर, प्रोफेसर राममोहन पाठक, प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र और हरीश नवल ने विषय, वक्ता और प्रारूप को अंतिम रूप दिया। 25 जुलाई को इस समिति की आखिरी बैठक थी।

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