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सीएनजी घोटाला: एक-दूसरे के खिलाफ काम न करें दिल्ली और केंद्र सरकार: हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से कहा कि वे एक दूसरे और अपने अधिकारियों के खिलाफ ‘‘दंडात्मक कदम’’ उठाकर मामलों को..

Author नई दिल्ली | Published on: September 24, 2015 9:55 AM

सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच को लेकर केन्द्र एवं दिल्ली सरकार के बीच मतभेद के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने दोनों से कहा कि वे एक दूसरे और अपने अधिकारियों के खिलाफ ‘‘दंडात्मक कदम’’ उठाकर मामलों को तूल न दें।

अदालत ने केन्द्र को आदेश दिया कि वह उपराज्यपाल के हाल के एक परिपत्र के सिलसिले में कोई दंडात्मक उपाय नही करे। इस परिपत्र में उपराज्यपाल ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि वे आप सरकार के ऐसे आदेश न माने जिन्हें केन्द्र सरकार ने निष्प्रभावी घोषित कर दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को भी इस बात के लिए पाबंद किया कि वह सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच आयोग कार्यवाही के सिलसिले में कोई दंडात्मक कदम न उठाए।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी एवं न्यायमूर्ति जयंतनाथ की पीठ ने दोनों सरकार से यह स्पष्ट तौर पर कहा कि वे तब तक एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई नहीं करें जब तक आप सरकार की याचिका लंबित है। इस याचिका में राज्य सरकार ने केन्द्र के 21 मई की उस अधिसूचना को चुनौती दी है जिसमें उपराज्यपाल को दिल्ली में विभिन्न पदों पर नौकरशाहों की नियुक्ति के लिए अबाधित अधिकार दिए गये हैं तथा भ्रष्ट्राचार निरोधक शाखा (एसीबी) को केन्द्र के नियंत्रण वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही से रोका गया है।

दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल द्वारा जारी 17 सितंबर को जारी किये गये उस परिपत्र को लागू होने से रोकने का अनुरोध किया है जिसमें कहा गया है कि आदेश का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारी राय है कि दोनों ही पक्षों को सुनना आवश्यक है…आगे का आदेश आने तक न तो दिल्ली सरकार और न ही केन्द्र, दोनों सरकारों द्वारा 17 सितंबर एवं 11 अगस्त को जारी किये गये परिपत्र पर कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाएंगी।’’

पीठ ने कहा कि वह इस मामले में रोजाना सुनवाई करेगी। यह अंतरिम आदेश केन्द्र की उस याचिका पर आया है जिसमें 11 अगस्त के आप सरकार के आदेश को चुनौती दी गयी है। इस आदेश में दिल्ली एवं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एस एन अग्रवाल को दिल्ली के परिवहन विभाग में सीएनजी फिटनेस प्रमाणपत्र संबंधी काम दिये जाने संबंधित सभी पहलुओं की जांच के लिए एक सदस्यीय पैनल का प्रमुख बनाया गया था। इस मामले में तत्कालीन शीला दीक्षित सरकार के कई अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा होनी है।

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