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कमजोर फेफड़ों के साथ बड़े हो रहे हैं बच्चे

वायु प्रदूषण से बढ़ती मुसीबतों के साथ ही चिंताजनक पहलू यह भी है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों के फेफड़ों का सही से विकास नहीं हो पा रहा है।
Author नई दिल्ली | January 17, 2016 03:41 am
कमजोर फेफड़ों के साथ बड़े हो रहे हैं बच्चे

वायु प्रदूषण से बढ़ती मुसीबतों के साथ ही चिंताजनक पहलू यह भी है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों के फेफड़ों का सही से विकास नहीं हो पा रहा है। लिहाजा अब व्यापक रणनीति बना कर प्रदूषण में कमी लाने के लिए इस दिशा में काम किए जाने की दरकार है।  यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘पल्मोक्रिट’ में दी गई। चेस्ट (अमेरिकन कालेज आॅफ चेस्ट फिजीशियन) के साथ मिल कर किए गए इस सम्मेलन में देश और विदेश से आए विशेषज्ञों ने कहा कि दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों के पांच बड़े कारणों में से तीन वजहें फेफड़ों से संबंधित बीमारियां हैं।
एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डाक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जिस तरह से हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं उसी तरह से फेफड़ों को भी सही से आक्सीजन न मिल पाने या तमाम दूसरे कारणों से अटैक बढ़ रहे हैं। बच्चों को साफ आक्सीजन नहीं मिलने से उनके फेफड़ों का पूरा विकास नहीं हो पा रहा है। अविकसित फेफड़े प्रदूषण का बोझ नहीं झेल पा रहे हैं। इससे बच्चों में दमा, निमोनिया व लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में मरीज को होने वाली दिक्कत का तुरंत व सही पता लगाना एक बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों ने चेताया कि वायु प्रदूषण व तंबाकू के अत्यधिक उपयोग के कारण वह दिन दूर नहीं जब डाक्टरों को स्टेथेस्कोप की तर्ज पर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें लेकर चलना अनिवार्य होगा। कारण कि जब तक मरीज की जांच का इंतजाम किया जाता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। मरीज को बचाने के लिए गहन चिकित्सा कक्ष में तमाम जरूरी उपकरणों की तरह अल्ट्रसाउंड का होना अनिवार्य करने की जरूरत है। इस उपकरण के उपयोग का प्रशिक्षण भी केवल रेडियोलाजिस्ट के बजाय हर चिकित्सक को दिए जाने की दरकार है।

एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन के डॉक्टर करण मदान ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण के कारण देश ही नहीं दुनिया भर में फेफड़ों के मरीजो की संख्या बढ़ रही है। इसके कारण आने वाले समय में बच्चे भी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जहां पश्चिमी देश इसमें तकनीकी विशेषज्ञता हासिल कर प्रदूषण के स्तर में कमी ला रहे हैं वही हमारे देश में इस मामले में अभी बहुत ध्यान देने की जरूरत है। मौजूदा वाहनों का उत्सर्जन सुधारा जाए और हरित वाहन बढ़ाए जाएं।
एम्स में देश व दुनिया भर के तमाम श्वसनतंत्र के करीब 400 विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों व अनिद्रा की चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं। लोगों को मुद्दे से जागरूक करने के लिए प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

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