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छोटे आकार की कम वजनी तरकारी में ही समझदारी

20 साल पहले 10 से 20 किलो तक के तरबूज का अच्छा खासा बाजार था। पहले उत्तर प्रदेश के गंगा किनारे के इलाकों रामपुर, बुलंदशहर, मुजफ्फरपुर आदि से 10 से 20 किलो की किस्म अनारकली खूब आती थी।

एक किलो वजनी फूल गोभी लोगों में अधिक लोकप्रिय हो रही हैं।

हितेंद्र श्रीवास्तव

संयुक्तपरिवारों के दरकने का असर फल व सब्जियों के आकार पर भी पड़ा है। छोटे परिवारों के कारण कुछ सालों में कृषि वैज्ञानिकों ने फल व सब्जियों के कई ऐसे बीज विकसित किए हैं जिनकी पैदावार का वजन बमुश्किल एक से ढाई किलो के बीच होता है। इन्हीं बीजों का परिणाम है कि छोटे आकार की गोभी, घीया (लौकी), सीताफल, तरबूज आदि का बाजार बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है।

शहरीकरण के एकल या छोटे परिवारों की रोजमर्रा की फल व सब्जी की जरूरत बमुश्किल एक किलो के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है। इसका सीधा असर यह हुआ कि जो बड़ी लौकी 20 साल पहले सब्जी वाले काट कर एक पाव या आधा किलो में देते थे, वो गुजरे दिनों की बात हो गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जेपीएस डबास के मुताबिक 20 साल पहले बड़े आकार के घीया की किस्म ‘पूसा समर प्लोफिक लांग’ की मांग अधिक होती थी। इसकी लंबाई आमतौर पर डेढ़ से ढाई फुट तक होती थी। लेकिन अब एकल परिवार और कटी हुई सब्जी से दूरी बरतने के कारण एक किलो या इससे कम वजनी की लौकी की मांग अधिक है। गोल आकार के घीया की किस्म ‘पूसा नवीन’ का वजन 500 ग्राम से एक किलो तक होता है। इसी तरह नासपाती के आकार वाली ‘पूसा संतुष्टि’ खासी लोकप्रिय हो रही है। छोटे आकार की गोल लौकी या घीया में ‘पूसा संदेश’, लंबी घीया में ‘पूसा संकर-3’ की किस्में भी बहुत पसंद आ रही हैं।

दिल्ली स्थित आजादपुर फल व सब्जी मंडी के थोक व्यापारी संजू कोहली ने बताया कि बीते चार साल से छोटा घीया अधिक आ रहा है। मंडी में छोटे आकार के घीया के बाजार की हिस्सेदारी कम से कम 70 फीसद है। राजस्थान में बालाजी के पास के सिकंदरा इलाके के किसान बबलू ने बताया कि दिल्ली के बाजार में छोटा घीया 20 रुपए तक बिक जाता है जबकि उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बड़ा घीया दो रुपए किलो के इर्दगिर्द बिकता है। घीया को मंडी तक भेजने में डेढ़ से ढाई रुपए तक लागत आती है। लिहाजा वह दिल्ली व आसपास के इलाकों में बड़े आकार की घीया बेचने नहीं आते हैं।

देश के कई इलाकों में पहले आठ से दस किलो तक के सीताफल (कद्दू या कुम्हड़ा) खूब बिकते थे। आजादपुर फल व सब्जी मंडी के थोक व्यापारी अशोक कुमार के मुताबिक पहले इंदौर और कोलकाता से 10 से 15 किलो तक का सीताफल (कद्दू) खूब आता था। मंडी में कम वजन के सीताफल की किस्मों चक्री, सेंचुरी आदि का बाजार तेजी से बढ़ा है जिनका वजन एक से पांच किलो तक रहता है। डॉ. डबास के मुताबिक एक से ढाई किलो की सीताफल की किस्म ‘पूसा विश्वास’ किसानों को खूब पसंद आ रही है। एकल परिवार बढ़ने के कारण आधा से एक किलो वजनी फूल गोभी लोगों में अधिक लोकप्रिय हो रही हैं। इस प्रजाति की गोभी में कार्तिक, पूसा मेघना, पूसा सर्द और पूसा स्नोबॉल प्रमुख रूप से उगाई जा रही हैं।

20 साल पहले 10 से 20 किलो तक के तरबूज का अच्छा खासा बाजार था। पहले उत्तर प्रदेश के गंगा किनारे के इलाकों रामपुर, बुलंदशहर, मुजफ्फरपुर आदि से 10 से 20 किलो की किस्म अनारकली खूब आती थी। इसी तरह 10 से 15 किलो तक किस्में मक्का-मदीना, फजली आदि का अच्छा बाजार था। कुछ साल पहले छोटे आकार के नामधारी तरबूज की किस्म लोकप्रिय हुईं। अब नामधारी 295, 035, 048, मिश्री आदि किस्में भी खासी लोकप्रिय हो रही हैं।

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