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दिल्ली विधानसभा में गूंजा वर्णिका कुंडू का मामला

दिल्ली विधानसभा के चार दिवसीय मानसून सत्र के पहले दिन का शुरुआती डेढ़ घंटा वर्णिका कुंडू मामले की भेंट चढ़ गया। सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर पूरी तैयारी के साथ सदन की कार्यवाही में शामिल होने आया था
Author नई दिल्ली | August 9, 2017 04:03 am
दिल्ली विधानसभा में राज्य 2017-18 के लिए बजट पेश करते दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया। (PTI)

चंडीगढ़ की वर्णिका कुंडू के साथ छेड़छाड़ की घटना की गूंज मंगलवार से शुरू हुए दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में भी सुनाई दी। सत्तापक्ष के सभी विधायक ‘वी स्टैंड विद वर्णिका’ का बैज लगाकर सदन में आए। सदन के संशोधित कार्यसूची में वर्णिका मामले पर अल्पकालिक चर्चा में अंतिम मामला था। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इस मामले को महिला सुरक्षा के लिए अतिसंवेदनशील बताते हुए अपनी बात रखनी चाही। इस पर विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। इस वजह से कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष को मार्शल ने बाहर निकाला।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति में शुरू हुए दिल्ली विधानसभा के चार दिवसीय मानसून सत्र के पहले दिन का शुरुआती डेढ़ घंटा वर्णिका कुंडू मामले की भेंट चढ़ गया। सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर पूरी तैयारी के साथ सदन की कार्यवाही में शामिल होने आया था। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित तमाम मंत्री और विधायक कुंडू के समर्थन में बैज लगाए हुए थे।

सीवर मजदूरों की मौत पर संवेदना व्यक्त करने और महिला क्रिकेटरों और वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर बधाई देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कुंडू मामले पर अपना बयान पढञना चाहा। इस पर हस्तक्षेप करते हुए नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्त ने सीवर मजदूरों के मौत मामले पर काम बाकी
रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। भाजपा के तीनों विधायक वेल में आकर, ‘दिल्ली सरकार हत्यारी है’ ‘मुख्यमंत्री कहां हैं’ की नारेबाजी करने लगे। विपक्ष की नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने फिर से खड़े होकर बोलने की कोशिश की। इस बीच सत्ता पक्ष के भी कई विधायक वेल में आकर ‘भाजपा के बेटों से बेटी बचाओ, भाजपा के गुंडों से बेटी बचाओ’ की नारे लगाने लगे। वेल में पक्ष-विपक्ष की नारेबाजी देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य फिर वेल में आ गए। दोनों पक्ष करीब आधे घंटे तक एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

दूसरे स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष फिर से वेल में था। इस बीच मनीष सिसोदिया ने सीवर मजदूरों की मौत के मुद्दे पर अपना बयान देना चाहा, लेकिन विपक्ष हंगामा करता रहा। यह देखकर अध्यक्ष ने मार्शल बुलाकर भाजपा के विजेंद्र गुप्त और मनजिंदर सिंह सिरसा को सदन से बाहर करवा दिया। इस पर जगदीश प्रधान ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। विपक्ष रहित सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने वर्णिका कुंडू मामले पर बात रखी। उन्होंने नेता विपक्ष द्वारा उनका बयान न पढ़ने दिए जाने के प्रयास को अभद्र बताया। उन्होंने कहा, ‘चंडीगढ़ जैसे महानगर में इस तरह की घटना महिला सुरक्षा व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है। इसके बावजूद जिस तरह से वर्णिका कुंडू ने इस पूरे मामले में संघर्ष का जो रस्ता अपनाया है वह सराहनीय है। दोषी कोई भी हो, उसे सजा मिलनी ही चाहिए। पुलिस को निष्पक्ष ढंग से इस मामले की जांच करनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।’संशोधित कार्यसूची पर टिप्पणी करते हुए नेता विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के प्रारंभ में काम रोको प्रस्ताव ‘दलित मजदूरों की मौत’ की चर्चा को रोकने के लिए आप विधायकों ने कार्यसूची की पांचवी संख्या की अल्पकालिक चर्चा ‘वर्णिका कुंडू’ मुद्दा बनाया।

 

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