challanges of central government ayushman bharat yojana - ‘आयुष्मान भारत’ के लिए दिल्ली अभी दूर है... - Jansatta
ताज़ा खबर
 

‘आयुष्मान भारत’ के लिए दिल्ली अभी दूर है…

केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत’ योजना के लिए फिलहाल न तो दिल्ली सरकार तैयार है और न ही निजी अस्पताल इसे लेकर उत्साहित हैं। इ

Author नई दिल्ली, 11 अगस्त। | August 12, 2018 3:53 AM
एक तरफ जहां केंद्र सरकार 15 अगस्त से ‘आयुष्मान भारत’ योजना को शुरू करने की तैयारी में है, वहीं दिल्ली और एक अन्य राज्य सरकार में इस योजना को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।

केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत’ योजना के लिए फिलहाल न तो दिल्ली सरकार तैयार है और न ही निजी अस्पताल इसे लेकर उत्साहित हैं। इस योजना के तहत गरीब लोगों को पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा दिए जाने का प्रावधान है। दिल्ली सरकार ने इस योजना को लेकर केंद्र के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। अगर ये शर्तें नहीं मानी गर्इं तो दिल्ली सरकार अपनी एक अलग बीमा योजना शुरू करेगी। केंद्र की योजना में जहां 30 लाख दिल्ली वाले शामिल हैं, वहीं दिल्ली सरकार की योजना में करीब 1.20 करोड़ लोगों को शामिल करने का प्रस्ताव है। दिल्ली के अलावा पंजाब में भी अभी तक इस योजना पर सहमति नहीं बन पाई है।

एक तरफ जहां केंद्र सरकार 15 अगस्त से ‘आयुष्मान भारत’ योजना को शुरू करने की तैयारी में है, वहीं दिल्ली और एक अन्य राज्य सरकार में इस योजना को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। दिल्ली के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ कीर्तिभूषण ने कहा कि हमने केंद्र सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, अगर उन्हें मान लिया गया तभी हम केंद्र की इस योजना को दिल्ली में लागू करेंगे। इस योजना में 60 फीसद पैसा केंद्र और 40 फीसद दिल्ली सरकार लगाएगी, लेकिन अगर केंद्र सरकार हमारी शर्तें नहीं मानती है तो हम एक अलग स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने का फैसला लेंगे। इसकी राशि भी पांच लाख रुपए तक की होगी।

दिल्ली सरकार ने रखीं शर्तें

डॉ भूषण के मुताबिक, केंद्र सरकार ने हमारे सामने जो प्रस्ताव रखा है उसमें साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। पिछली गणना में दिल्ली की कुल आबादी 1.68 करोड़ थी, लेकिन अब यह बढ़कर 1.80 करोड़ तक पहुंच गई है। ऐसे में काफी लोग इस योजना में छूट जाएंगे, जबकि हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें शामिल किए जा सकें। इसीलिए हमने अभी आपसी समझौते पर दस्तखत नहीं किए हैं। डॉ भूषण ने बताया कि हमने केंद्र के सामने जो प्रस्ताव रखा है उसके मुताबिक, दिल्ली में बीमा योजना के लिए नामित किए जाने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए दो आधार बनाए गए हैं। एक तो यह कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल सभी कार्ड धारकों को इस योजना के दायरे में लाया जाए। दूसरा आधार यह है कि वे सभी लोग जिनकी बिजली की खपत दो किलोवाट या उससे कम है। जो सरकारी नौकरी में हैं या जो लोग आयकर जमा करते हैं, उन्हें छोड़कर सभी को इसके दायरे में लाने की दरकार है। इस तरह से करीब 1.20 करोड़ लोगों को इस योजना में लाया जाना चाहिए। इन्हीं शर्तों के साथ हमने केंद्र के सामने अपनी बात रखी है। अगर हमारी शर्तें मान ली जाती हैं हम इस महीने के अंत तक समझौते पर दस्तखत कर देंगे। वरना हम अपनी योजना लागू करेंगे और उसे भी इसी आधार पर लागू किया जाएगा।

निजी अस्पतालों की दिलचस्पी नहीं

केंद्रीय योजना के सामने दूसरी बड़ी अड़चन निजी अस्पतालों के लिए तय की गई दरें हैं। केंद्र ने बीमा क्लेम की जो दरें तय की हैं, वह निजी अस्पतालों के लिहाज से काफी कम हैं। कई जगह तो सीजीएचएस (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) की दरों से भी कम दरें तय की गई हैं। इसके अलावा दिल्ली काफी महंगा शहर है और पूरे देश में एक जैसी दरें लागू नहीं की जा सकती हैं। यही वजह है कि निजी अस्पताल इस योजना में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन का भी कहना है कि ये दरें सीजीएचएस से भी काफी कम हैं, जबकि सीजीएचएस की दरें भी साल 2013 से संशोधित नहीं की गई हैं। संगठनों ने मांग की है कि ये दरें सीजीएचएस से करीब 20 फीसद अधिक रखी जाएं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App