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बीमारियों का डिजिटल ब्योरा रखने की तैयारी

23.59 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को अंजाम देने के लिए सरकार ने नेशनल रिसोर्स सेंटर की स्थापना की है। रिसोर्स सेंटर रिकॉर्ड तैयार करने में सेंटर फॉर डेवलपमेंट आॅफ एडवांस्ड कंप्यूटिंंग से तकनीकी मदद लेगा।

Author नई दिल्ली | Updated: December 22, 2018 2:42 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

जनसत्ता संवाददाता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देशभर के मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर) तैयार करेगा। इस बारे में शुक्रवार को दिशानिर्देश व मानक जारी किए गए। 23.59 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को अंजाम देने के लिए सरकार ने नेशनल रिसोर्स सेंटर की स्थापना की है। यह सेंटर रिकॉर्ड तैयार करने में सेंटर फॉर डेवलपमेंट आॅफ एडवांस्ड कंप्यूटिंंग (सी-डैक) से तकनीकी मदद लेगा। इस सेंटर के विकास के लिए सी-डैक को चार करोड़ रुपए दिए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से देशभर के विभिन्न अस्पतालों में आने वाले मरीजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे जहां मरीजों का पूरा ब्योरा सरकार के पास उपलब्ध होगा, वहीं मरीजों के लिए उपलब्ध संसाधनों व सुविधाओं का भी पता चलेगा। इससे मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर भी निगाह रखी जा सकेगी और नीति निर्माण में भी मदद मिलेगी।
देश के विभिन्न अस्पतालों में आने वाले मरीजों के पंजीकरण से लेकर उनकी जांच व इलाज का सारा ब्योरा कंप्यूटर में दर्ज होगा। इस काम के लिए सी-डैक तकनीकी सहायता मुहैया कराएगा। इसके कुल खर्च में से करीब चार करोड़ रुपए सी-डैक को दिए गए हैं। सी-डैक अस्पतालों को बुनियादी संसाधन खड़ा करने, ईएचएआर मानक लागू करने व आगे उस पर अमल करने में सहायता करेगा।

अस्पतालों में कंप्यूटर का इस्तेमाल शुरू होने के साथ ही मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक आंकड़े तैयार करने की जरूरत महसूस होने लगी थी। काफी कोशिशों के बाद साल 2013 में इस तरह के आंकड़े तैयार करने वाले प्रणाली की रूपरेखा तैयार की गई, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हो पाया। आखिरकार 2016 में ईएचआर मानक तैयार किया गया व इसके लिए अधिसूचना जारी की गई। इस मानक में मरीजों की शुरुआती बीमारी से लेकर साल दर साल उनको आने वाली परेशानियों का ब्योरा रखा जाएगा।

मंत्रालय का कहना है कि एक मरीज की उम्र मान लो 80 साल है। ऐसे में उसके जन्म के समय से लेकर 80 सालों तक के स्वास्थ्य का ब्यौरा रखना आसान नहीं है। लेकिन इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड में यह संभव होगा। अस्पतालों के लिए तैयार मानकों में यह भी शामिल होगा कि उनके पास मरीजों का डाटा संरक्षित रखने के पर्याप्त संसाधन हो। हार्डवेयर व साफ्टवेयर से लेकर बिजली की उपलब्धता व बैकअप की सहूलियत वगैरह भी रखनी होगी। इसमें सी-डैक के जरिए नेशनल रिसोर्स सेंटर मदद करेगा। इलेक्ट्रॉनिक आंकड़े में मरीज ने कहां पर किस बीमारी का क्या इलाज कराया, इसके नतीजे क्या रहे, किस मरीज को क्या-क्या बीमारी हुई, इसकी जांच में क्या मिला, सब कुछ दर्ज होगा। इसमें मरीज के आर्थिक, सामाजिक व भौगोलिक ब्योरे के साथ ही विभिन्न जानकारियां होंगी, जिससे तमाम विभागों में काम के लिए आपसी तालमेल बिठाने में आसानी होगी। इसके साथ ही तमाम आइटी उपकरण उपलब्ध कराने वालों को भी मदद मिलेगी कि कितने तरह की कितनी डिवाइस विकसित करने की दरकार है। मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में लोग ज्यादा सचल हैं हर हाथ में मोबाइल है। लोगों की आवाजाही भी बढ़ी है। ऐसे में लोग चाहेंगे कि उनकी स्वास्थ्य संबंधी सूचना, उनकी स्थिति व चल रही दवाओं का ब्योरा फोन पर भी उपलब्ध हो। ऐसे में इस पहल से यह संभव होगा कि मरीज का ब्योरा हर वक्त उसके पास होगा।

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