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‘मर्दों में बढ़ती हवस की भूख से बढ़ रहा पॉर्न का धंधा’

देश में बढ़ते पॉर्न का जिम्मेदार सीबीआई अनुसार भारतीय मर्दों की हवस को ठहरा रही है। हाल ही सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि मौजूदा व्यवस्था में हिंसात्मक पॉर्न को रोक पाना बेहद मुश्किल भरा काम है।

देश में बढ़ते पॉर्न का जिम्मेदार सीबीआई अनुसार भारतीय मर्दों की हवस को ठहरा रही है। हाल ही सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि मौजूदा व्यवस्था में हिंसात्मक पॉर्न को रोक पाना बेहद मुश्किल भरा काम है। यह तभी रोका जा सकता है जब मर्द हवस को कंट्रोल करेंगे, लेकिन ऐसा होने से रहा भला।

सीबीआई की ओर से कोर्ट को सौंपे गए हलफनामे के मुताबिक ‘मर्दों की कभी न पूरी होने वाली हवस की मांग को पूरी करने के लिए पॉर्न कंटेंट उपलब्ध करवाने वाले लोग लगातार साइट बदलते रहते हैं, जिस पर नियंत्रण अब नामुमकिन सा हो गया है और यही वजह है कि पॉर्न लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

सीबीआई ने कोर्ट को बताया है कि यह कड़वी सच्चाई है कि सूचना तकनीक के क्षेत्र में आए बदलाव का नतीजा ही बढ़ती रेप की संख्या को नया रूप दे दिया है।

बकौल सीबीआई साइबर सेक्स का स्वरूप कुछ ऐसा हो चुका है कि राज्य की सीमाओं में बंधी पुलिस के लिए इन पर नियंत्रण कर पाना नामुमकिन है। यदि एक वेबसाइट को ऐसे कंटेंट के कारण ब्लॉक कर दिया जाता है, तो दूसरे-तीसरे वेबसाइट पर कंटेंट डाल दिया जाता है।

लिहाजा यह धंधा हमेशा ही चलता रहता है। बढ़ते इंटरनेट पर ऐसे भयानक अपराध करने के बाद रिकॉर्डिड वीडियो को अपलड कर दिया जाता है, जिसे देख दूसरे लोगों के अंदर भी हवस की भूख बढ़ जाती है और वे महिलाओं के साथ मानवीयता को भूल शैतान बन जाते हैं। इस तरह के वीडियो इंटरनेट के जरिए पूरी दुनिया में फैल रहे है, जिसे देख दूसरे भी इसी तरह की करतूत करते हैं।

भारत में साइबर सेक्स व हिंसात्मक पॉर्न के मामलों की जांच करने व अपराधियों को पकड़ने के लिए सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ज्यादातर अपराधी दूसरे देशों के हैं और हमें लगता है कि इस तरह के मामलों की जांच करने में वह सक्षम है। इसके लिए सीबीआई ने अपने अनुभव व विशेषज्ञता का हवाला भी दिया।

सीबीआई ने सुझाव दिया है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स व सोशल नेटवर्किंग साइट्स के साथ एक सीबीआई अधिकारी को तैनात करना चाहिए। इससे मामले पर तेजी से काम करने में मदद मिल सकती है। इसके पीछे सीबीआई ने अमेरिका का भी उदाहरण दिया, जहां एफबीआई अधिकारियों को बड़ी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के साथ नियुक्त किया जाता है। अगर इसी तरह भारत में हो जाए तो कुछ हद तक पॉर्न को रोका जा सकता है।

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