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प्रणय रॉय के घर सीबीआई छापे पर बोले अरुण शौरी-बायकॉट करें केन्द्रीय मंत्रियों का, असहयोग आंदोलन की करें शुरुआत

अरुण शौरी ने कहा कि इस वक्त पत्रकारों के तीन समर्थक है, पहला हमारी एकजुटता, दूसरा कोर्ट और तीसरा हमारे पाठकों और दर्शकों का विश्वास।

नयी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में मौजूद अरुण शौरी, प्रणय रॉय एवं कई दूसरे वरिष्ठ पत्रकार (Photo-Twitter/ @madhutrehan)

देश के जाने-माने पत्रकार प्रणय रॉय और एनडीटीवी पर सीबीआई के छापे के खिलाफ दिल्ली के प्रेस क्लब में शुक्रवार (9जून) को देश के नामी गिरामी संपादक-पत्रकार इकट्ठा हुए और केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर हमला बोला। प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किये। अरुण शौरी के बयान को कोट करते हुए एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने लिखा, ‘जिस किसी ने भी मीडिया के खिलाफ हाथ उठाने की कोशिश की उसका हाथ जल गया।’ अरुण शौरी ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें केन्द्रीय मंत्रियों के कार्यक्रमों का बहिष्कार करना चाहिए, आपको अपने कार्यक्रम में मंत्रियों को नहीं बुलाना चाहिए। अरुण शौरी ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार दबाव का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने अभी एनडीटीवी को उदाहरण बनाया है, आने वाले महीनों में ये दबाव बढ़ेगा। अरुण शौरी ने कहा कि इस वक्त पत्रकारों के तीन समर्थक है, पहला हमारी एकजुटता, दूसरा कोर्ट और तीसरा हमारे पाठकों और दर्शकों का विश्वास।

इस कार्यक्रम को एनडीटीवी के को-फाउंडर प्रणय रॉय ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एनडीटीवी के ऊपर लगाये गये सारे आरोप पूरी तरह से झूठ और मनगढ़ंत है। प्रणय रॉय ने कहा, ‘हालांकि कानून से ऊपर कोई नहीं है, लेकिन मुझे कहाना है कि हमलोग इन सारे झूठे आरोपों का सामना पारदर्शी तरीके से करेंगे, लेकिन हम सिर्फ ये चाहते हैं कि इस पूरे मामले की जांच एक समय-सीमा के अंदर हो।’ उन्होंने सभी पत्रकारों से अपील की और कहा कि सरकार के दबाव के सामने कतई ना झुकें, अगर हम एक बार झुक गये तो सत्ता हावी हो सकती है।पत्रकारों के इस जमावड़े में फली नरीमन, एच के दुआ, राजदीप सरदेसाई समेत कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए।

बता दें कि 6 जून को सीबीआई ने मीडिया मुगल प्रणय रॉय के दिल्ली और देहरादून स्थित ठिकानों पर छापा मारा था। सीबीआई ने इस मामले में प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है। इन दोनों पर निजी बैंक ICICI को 48 करोड़ रुपये नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई के इस छापे को कई पत्रकारों ने राजनीति से प्रेरित बताया है।

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