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बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई को भेजा लीगल नोटिस, पूछा- सेक्शुअल हैरेसमेंट पर क्यों नहीं किया कानून का पालन

देश में सात राष्ट्रीय, 59 राज्य स्तर और 2,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड पार्टियां हैं। सभी पार्टियां अपने चुनाव प्रचार में महिलाओं की सुरक्षा के वादे करती हैं। लेकिन इनमें से बहुत पार्टियों में आंतरिक शिकायत कमेटी नहीं है। जबकि कार्यस्थल पर महिलाओं संग यौन उत्पीड़न (PPR) एक्ट 2013 के तहत ऐसा होना जरुरी है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

दिल्ली के सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज (CASC) ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को लीगल नोटिस भेजा है। इसमें भाजपा प्रमुख से पचास हजार रुपए के जुर्माना मांगा गया है। इसके अलावा नोटिस कांग्रेस और सीपीआई (एम) को भी भेजा गया है। जानकारी के मुताबिक तीनों को नोटिस मीटू मामले में यौन उत्पीड़न के अभियान को लेकर दिया गया है। कहा गया है कि मीटू अभियान इसलिए उभरा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संसद द्वारा 2013 में पारित कानून के बाद भी राजनीतिक दलों द्वारा ‘विशाखा’ का पालन नहीं किया जा रहा है। विशाखा महिलाओं के खिलाफ अत्यचारों को लेकर एक कानून है। नोटिस में आगे लिखा गया है कि राजनीतिक पार्टियां, देश की सबसे बड़ी निजी संस्था हैं। इनके सदस्यों की संख्या भी करोड़ों है। लेकिन इन पार्टियों द्वारा उस कानून को अमल नहीं लाया गया जिसकी जरुरत हर उस संस्थान में होती है जहां कम से कम दस वर्कर भी होते हैं। इसके अलावा आंतरिक शिकायत कमेटी की गैर मौजूदगी में पीड़ितों के लिए उचित याचिका निवारण तंत्र भी मौजूद नहीं है। राजनीतिक नेता ज्यादातर सरकारों से जुड़े होते हैं और पुलिस को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में काफी मुश्किल हो जाता है कि पीड़िता पुलिस तक पहुंच सके।

नोटिस में आगे लिखा गया, ‘देश में सात राष्ट्रीय, 59 राज्य स्तर और 2,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड पार्टियां हैं। सभी पार्टियां अपने चुनाव प्रचार में महिलाओं की सुरक्षा के वादे करती हैं। लेकिन इनमें से बहुत पार्टियों में आंतरिक शिकायत कमेटी नहीं है। जबकि कार्यस्थल पर महिलाओं संग यौन उत्पीड़न (PPR) एक्ट 2013 के तहत ऐसा होना जरुरी है।’ बता दें कि नोटिस मशहूर वकील विरग गुप्ता द्वारा भेजा गया है, गुप्ता CASC के सह-संस्थापक भी हैं। इस नोटिस की शुरुआत में लिखा गया है कि भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई (एम) में आंतरिक शिकायत कमेटी नहीं है। अन्य राजनीतिक पार्टियों का हवाला देते हुए नोटिस में आगे पूछा गया है कि मंत्रालय को कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए कि कानून के मुताबिक इन पार्टियों ने कमेटी का गठन क्यों नहीं किया। इसके अलावा नोटिस की एक कॉपी चुनाव आयोग को भेजी गई है।

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