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राज्‍यों में हिंदुओं को अल्‍पसंख्‍यक का दर्जा देने के मामले में नहीं दे सकते दिशा-निर्देश, बोला सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रविंद्र भट की बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड को जांचे बगैर इस तरह का आदेश नहीं दिया जा सकता।

राज्‍यों में हिंदुओं को अल्‍पसंख्‍यक का दर्जा देने के मामले में नहीं दे सकते दिशा-निर्देश, बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट Photo – File

राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये कोर्ट का काम नहीं है। किसी भी समुदाय विशेष को अल्पसंख्यक का दर्जा देने से पहले तमाम पहलुओं को देखा जाता है। ये मामला न्यायिक सिस्टम से बाहर का है। कोर्ट ने कहा कि वो हिंदुओं को राज्यों में अल्पसंख्यक का दर्जा देने के बारे में कोई आदेश जारी नहीं कर सकता।

जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रविंद्र भट की बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड को जांचे बगैर इस तरह का आदेश नहीं दिया जा सकता। बेंच ने कहा कि ये कोर्ट का काम नहीं है। अल्पसंख्यक का दर्जा केस विशेष पर निर्भर करता है। जब तक आप ये साबित नहीं करते कि हिंदुओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, तब तक कोर्ट कुछ भी कहने में असमर्थ है। बेंच ने ये बात एडवोकेट अश्वनि उपाध्याय से कही। वो मथुरा निवासी देवकीनंदन ठाकुर की तरफ से अदालत में इस मामले की पैरवी कर रहे थे।

जून में दाखिल की गई याचिका में नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी (NCM) एक्ट 1992 के साथ NCMEI एक्ट 2004 के प्रावधानों को चुनौती दी गई थी। इसके तहत अल्पसंख्यकों को विशेष लाभ दिए जाते हैं। NCM ने अभी तक ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, पारसी व जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है। सोमवाप को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि 1957 के बाद से कई ऐसे फैसले शीर्ष अदालत ने किए हैं, जिनमें कहा गया है कि धार्मिक व भाषाई आधार पर अल्पसंख्यक का दर्जा देना राज्य का विषय है। 1957 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि सूबे की आबादी के हिसाब से अल्पसंख्यक का दर्जा तय किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि आप हमें बताए कि हिंदू कहां अल्पसंख्यक हैं। एक मामले को देखने के बाद कोई फैसला दिया जा सकता है। लेकिन आप चाह रहे हैं कि कोर्ट एक आम फैसला दे जो सभी राज्यों में लागू हो। बेंच का कहना था कि ये संभव नहीं है।

2002 के TMA Pai केस का जिक्र कर कोर्ट ने कहा कि तब 11 जजों की बेंच ने मामले की व्याख्या की थी। एडवोकेट अश्वनि उपाध्याय ने कोर्ट से अपील की कि इसी मामले पर उनकी एक अपील दूसरी बेंच में लंबित है। उस पर 30 अगस्त को सुनवाई होनी है। कोर्ट ने देवकीनंदन ठाकुर की याचिका को सितंबर के पहले सप्ताह में दूसरी याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध कर दिया।

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