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मच्छर से मुकाबले की तैयारियों का होगा ऑडिट

कैग ने मच्छर जनित बीमारियों से निपटने में दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों के ऑडिट का आदेश दिया है..

Author नई दिल्ली | September 26, 2015 10:02 am
इस साल बड़े स्तर पर डेंगू के फैलने से 28 लोगों की मौत हो चुकी है और ऐसी खबरें हैं कि सुविधाओं के अभाव में कई मरीजों को अस्पतालों से लौटा दिया गया।

राजधानी में डेंगू के प्रसार से चौकन्ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) शशिकांत शर्मा ने मच्छर जनित बीमारियों से निपटने में दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों के ऑडिट का आदेश दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, कैग जांच में मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए दिल्ली सरकार और निगम प्रशासन-नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली नगर निगम के उठाए गए ऐहतियाती उपायों की पड़ताल की जाएगी। इस साल बड़े स्तर पर डेंगू के फैलने से 28 लोगों की मौत हो चुकी है और ऐसी खबरें हैं कि सुविधाओं के अभाव में कई मरीजों को अस्पतालों से लौटा दिया गया।

सूत्रों ने कहा कि कैग जांच में साफ-सफाई, छिड़काव, नालों और मेनहोल के रख-रखाव के लिए प्रयासों पर भी गौर किया जाएगा। अन्य चीजों में ऑडिट से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की तैयारियां और बीमारी के इलाज और जांच के लिए कर्मचारियों के प्रशिक्षण की भी पड़ताल की जाएगी।

कैग की ओर से दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव अमर नाथ को भेजे पत्र के मुताबिक, सरकारी ऑडिटर बजटीय प्रावधानों व केंद्र राज्य सरकारों की ओर से वक्त पर फंड रिलीज किए जाने, सूचना देने और निगरानी तंत्र सहित विभिन्न एजंसियों के बीच समन्वय पर भी गौर करेगा।

मच्छर जनित समस्या से निपटने में तैयारियों की कमी पर चिंतित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) पहले ही केंद्र और दिल्ली सरकार को उन खबरों पर नोटिस जारी कर चुका है जिनमें कहा गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में अस्पतालों में भर्ती किए जाने से इनकार के बाद कथित तौर पर कई डेंगू मरीजों की मौत हो गई। एनएचआरसी ने प्रशासन से अपनी रिपोर्ट में दोषी अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में बताने को कहा है जिसने डेंगू मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर दिया।

इसके साथ ही दिल्ली में डेंगू की रोकथाम और इलाज के लिए दीर्घावधि और लघु अवधि में उठाए जाने वाले कदमों से भी अवगत कराने को कहा गया है। एनएचआरसी ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ‘अस्पतालों की लापरवाही से हुई मौत के लिए सरकार की तरफ से तैयार मुआवजा कार्यक्रम पर भी जानकारी मांगी गई है’।

मुंबई में 1200 रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर:

मुंबई में सरकारी किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल के 1200 से ज्यादा रेजिडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार तड़के डेंगू से मौत के शिकार होने वाले एक बच्चे के परिजनों द्वारा उनके तीन साथियों पर हमले के खिलाफ हड़ताल का आह्वान किया है। विरोध कर रहे डॉक्टरों ने मांग की है कि डॉक्टर्स प्रीवेंशन एक्ट के तहत जब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती और आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे सामूहिक हड़ताल जारी रखेंगे।

महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों के नियामक संगठन सेंट्रल एमएआरडी के उपाध्यक्ष डॉक्टर अमित लोमते ने बताया कि हमारे सहयोगी डॉक्टर सुहास, डॉक्टर कुशल और डॉक्टर पुनीत पर परिजनों ने हमला किया और लोहे की छड़ों से पीटा जिससे उनके शरीर पर जख्म के निशान बन गए। उन्होंने दावा किया कि ना तो पुलिस और ना ही अस्पताल प्रशासन उनकी पीड़ा सुनने के लिए आगे आए।

डेंगू से पीड़ित एक लड़के को कथित तौर पर बेड मुहैया न होने के कारण आइसीयू वार्ड में भर्ती नहीं किया गया जिसके बाद डॉक्टरों की कथित तौर पर पिटाई की गई। बाद में बच्चे को गुरुवार रात नौ बजे जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया।

जम्मू में कुल 17 मामले:

जम्मू क्षेत्र में चार और लोगों में डेंगू की पुष्टि होने के साथ इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। जम्मू में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉक्टर बलजीत सिंह पठानिया ने बताया, ‘गुरुवार को डेंगू के चार और नए मामलों की पुष्टि होने के साथ, पूरे जम्मू क्षेत्र में इसकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है’।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है जिसे लोगों को जागरूक करने के मकसद से स्थानीय अखबारों में व्यापक रूप से प्रकाशित किया गया है। हालिया बारिश से डेंगू का खतरा बढ़ गया है।

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