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नोयडा से अवंतिका तक बस सेवा नहीं

नोएडा सेक्टर 24 से अवंतिका के बीच चलने वाली लिमिटेड बस सेवा पिछले पंद्रह दिन से बाधित है।

Author दिल्ली | November 23, 2015 1:50 AM

आइपी डिपो की यह बस सेवा शाम 5.35 बजे चलती थी परंतु अब हम जैसे प्रतिदिन इस बस में सफर करने वाले लोगों को पता ही नहीं है कि यह बस कब तक नहीं आएगी। टाइमकीपर को फोन करने पर पता चलता है कि बस चल रही है। हकीकत यह है कि हम लोग बस के लिए बस स्टाप पर घंटों के इंतजार के बाद मायूस होकर किसी तरह घर को जाते हैं। इस रूट पर पहले ही खटारा बसें थीं और अब वे भी न आने से हम जैसे नियमित जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संबंधित उच्चाधिकारी इस रूट पर यथाशीघ्र सामान्य बस सही समय पर चलाने का आदेश दें, ताकि हम लोगों को कोई परेशान न हो।- शिवजी भगत, अवंतिका, दिल्ली।

राशनकार्ड जारी नहीं हुए
नरेला पुनर्वास कालोनी के हजारों लोग अपने राशन कार्ड के लिए धक्के खा रहे हैं। इसमें बीपीएल और एपीएल दोनों ही कार्डधारक हैं। कई महीनों तक उन्हें बताया गया कि आपके राशनकार्ड कंप्यूटर में प्रोसेस में हैं, लेकिन अब उन्हें बताया जा रहा है कि जिनके राशन कार्ड बनने थे, बन चुके। उच्चाधिकारियों को उन राशनकार्डों को देना चाहिए जो प्रोसेस में थे।
– टेकराम वर्मा, नरेला, दिल्ली।

लामपुर बार्डर पर बस नहीं
रूट संख्या 131 जो लामपुर बार्डर से पुरानी दिल्ली के बीच चलती है। इस रूट पर सवेरे और शाम बसों की भारी कमी है। आफिस आने-जाने वालों को इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कृपया इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
– वीना कुमारी, नरेला, दिल्ली।

अफसर फरियादियों के फोन नहीं सुनते
दिल्ली परिवहन निगम जनता से सीधा जुड़ा हुआ विभाग है परंतु इस विभाग के कनिष्ठ अधिकारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन व लैंड लाइन फोन हैं। इन फोनों पर आम आदमी को कार्यालय के समय के दौरान अपनी समस्याएं बताने का अधिकार है परंतु डीटीसी के वे अधिकारी जो यातायात विभाग से जुड़े हुए हैं आम आदमी का फोन नहीं सुनते हैं। दूसरी ओर डीटीसी की वेबसाइट पर किसी भी अधिकारी का मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं है। जनता से जुड़े विभाग में जनता से दूरी बनाना कितना उचित है। और नेट पर मोबाइल नंबर उपलब्ध न कराना सूचना क्रांति के युग में सूचना छुपाना अव्यवहारिक है। मेरा दिल्ली के मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री से अनुरोध है कि वे इस तरफ शीघ्र उचित कारवाई करें ताकि भविष्य में आम जनता को आवश्यक जानकारियों समय पर मिलती रहे।
– विजेंद्र सिंह डबास, ग्रामीण परिवहन विकास मंच, उत्तर-पश्चिम दिल्ली।

सड़क चौड़ी नहीं है
मुकुंदपुर गांव के आगे राधा विहार, जनता विहार, मुकुंद विहार पार्ट-1 व 2 और कारगिल जैसी कालोनियां बस गई हैं। जहां लाखों परिवार रह रहे हैं। इन कालोनियों में जाने के लिए जो मुख्य सड़क है वह इतनी संकरी है कि दो थ्रीवीलर भी आमने-सामने आ जाएं तो रास्ता बंद हो जाता है। एक-दो रास्ते बुराड़ी अथारिटी और कमल विहार की ओर से भी हैं। वे संकरे तो हैं ही पर साथ ही इतने ऊबड़-खाबड़ हैं कि वहां से गुजरना किसी सजा से कम नहीं है। अब जरूरी है कि मुख्य सड़क पर बढ़ाए गए मकानों के अवैध निर्माण तोड़े जाएं ताकि आम जनता को आने-जाने में कोई परेशान न हो।
– राजपाल, गली नंबर-11, राधा विहार, मुकुंदपुर गांव, दिल्ली।

मेट्रो में वरिष्ठ नागरिकों की परवाह नहीं
मेट्रो में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ सीटें आरक्षित हैं। हालांकि वरिष्ठ नागरिकों की संख्या को देखते हुए ये बहुत कम हैं। दिक्कत यह है कि इन सीटों पर लोग खासकर युवक व लड़कियां/महिलाएं कब्जा जमाए रहते हैं। खुद तो किसी वरिष्ठ नागरिक के लिए खाली करते नहीं पर कुछ तो ऐसे होते हैं कि कहने पर भी नहीं उठते। ऐसे लोगों के खिलाफ वैसी ही सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जैसी महिलाओं के डिब्बे में चढ़ने वाले पुरुषों के खिलाफ होती है।
– इंद्र सिंह धिगान, 3 रेडियो कालोनी, किंग्जवे कैंप, दिल्ली।

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