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हाई कोर्ट ने जारी की सहारा एम्बी वैली की नीलामी की नोटिस, 37,392 करोड़ होगी न्यूनतम बोली

बंबई उच्च न्यायालय ने सुब्रत रॉय के स्वामित्व वाले सहारा समूह को झटका देते हुए सोमवार को महाराष्ट्र में एंबी वैली परियोजना की नीलामी का नोटिस जारी किया है।
Author नई दिल्ली | August 14, 2017 11:11 am
सहारा का ड्रीम प्रोजेक्ट

बंबई उच्च न्यायालय ने सुब्रत रॉय के स्वामित्व वाले सहारा समूह को झटका देते हुए सोमवार को महाराष्ट्र में एंबी वैली परियोजना की नीलामी का नोटिस जारी किया है। एंबी वैली परियोजना के आधिकारिक परिसमापक (ऑफिशियल लिक्विडेटर) ने इस नीलामी का आरक्षित मूल्य 37,392 करोड़ रुपये रखा है। इससे तीन दिन पहले ही सर्वोच्च न्यायालय ने सहारा समूह की नीलामी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया था।

बंबई उच्च न्यायालय के ओएल विनोद शर्मा ने सोमवार को मीडिया में नीलामी के नोटिस जारी किए। ओएल के मुताबिक, संपत्तियों को देखते हुए नीलामी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी, जो दो दिनों तक चलेगी। यह परियोजना 6,761.64 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। ओएल ने संपत्ति के संभावित बोली लगाने वालों के लिए संपत्ति के बारे में बताते हुए कहा कि यह सहयाद्री पहाड़ी श्रृंखला पर प्रकृति की गोद में स्थित है।

गौरतलब है कि 25 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय से 1,500 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था, जो कि उनकी दो समूह कंपनियों द्वारा निवेशकों से उगाहे गए 24,000 करोड़ रुपये का किश्तों में भुगतान था।

अदालत ने रॉय को सात सितंबर तक 1,500 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था और बाकी की रकम का भुगतान 18 महीनों में करने के लिए एक ठोस योजना पेश करने का आदेश दिया था।

बंबई उच्च न्यायालय के आधिकारिक परिसमापक द्वारा एंबी वैली की नीलामी के लिए निविदाएं आमंत्रित करने के लिए सभी नियमों और शर्तों को मंजूरी देते हुए अदालत ने कहा था कि अगर सहारा सात सितंबर तक 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान करती है और आगे के भुगतान की योजना प्रस्तुत करती है तो एंबी वैली की नीलामी को स्थगित किया जा सकता है।

हालांकि, यह भुगतान पर निर्भर है। अदालत ने कहा था कि इस रकम में रॉय द्वारा अंतिम किश्म में भुगतान नहीं किए गए 305 करोड़ रुपये के शेष राशि भी शामिल है, जिसे 15 जून तक जमा करना है।

सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 2007 और 2008 में वैकल्पिक रूप से पूरी तरह से परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से 24,000 करोड़ रुपये आम निवेशकों से जुटाए थे। शीर्ष अदालत ने 2012 के 31 अगस्त को दिए आदेश में सहारा को 15 फीसदी ब्याज के साथ निवेशकों को यह रकम लौटाने का आदेश दिया था।

अदालत समूह से किश्तों में पैसे वसूल कर रही है। सहारा ने अब तक 16,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

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