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फिर ‘बांग्लादेशी निकालो’ अभियान चलाएगी भाजपा

दिल्ली में भाजपा के आंदोलन और अदालत के दखल से 1993 के विधानसभा चुनाव से पहले करीब तीन लाख बांग्लादेशी नागरिकों का नाम मतदाता सूची से हटाया गया।

Author नई दिल्ली, 1 अगस्त। | August 2, 2018 4:58 AM
दिल्ली में दोबारा ‘बांग्लादेशी निकालो’ आंदोलन चलाने की भूमिका बनाई जा रही है।

दिल्ली में भाजपा के आंदोलन और अदालत के दखल से 1993 के विधानसभा चुनाव से पहले करीब तीन लाख बांग्लादेशी नागरिकों का नाम मतदाता सूची से हटाया गया। भाजपा के नेता चाहे जो दावा करें लेकिन उसका लाभ उन्हें विधानसभा चुनाव में मिला। भाजपा करीब 43 फीसद वोट के साथ सरकार बनाने में कामयाब हो गई। दिल्ली पुलिस की शिथिलता और राजनीति दलों के समीकरणों के चलते उन्हें बाहर करने का अभियान नहीं चल पाया और शायद ही मतदान सूची से हटाया गया कोई बांग्लादेशी दिल्ली-एनसीआर से बाहर गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी कई आपराधिक मामलों में लिप्त पाए गए हैं और वांछनीय हैं।

इन्हें निर्वासित करने से न केवल दिल्ली में पानी और बिजली की आपूर्ति बेहतर होगी बल्कि रोजगार की उपलब्धता भी बढेगी और अपराधों में कमी आएगी। अब इसमें रोहिंग्या भी जोड़ दिए गए हैं। यह मुद्दा ऐसा है जिसका वैधानिक तरीके से कोई भी दल विरोध नहीं कर पाएगा, लेकिन यह सार्वजनिक है कि ऐसे लोगों के मत गैर भाजपा दलों को मिलते हैं। इसलिए भाजपा खुलकर उनका विरोध करती है। असम में तो सालों इस मुद्दे पर आंदोलन चला ही, भाजपा इसे अब बंगाल में शुरू करने वाली है। उसी के साथ दिल्ली में दोबारा ‘बांग्लादेशी निकालो’ आंदोलन चलाने की भूमिका बनाई जा रही है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मंगलवार को लोकसभा में और बुधवार को संसद परिसर में दिल्ली में अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को बाहर करने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के प्रमुख रहे जगदीश ममगांई ने प्रधानमंत्री समेत देश के प्रमुख लोगों को पत्र लिख कर दिल्ली में अवैध तरीके से रह रहे करीब 13 लाख बांग्लादेशियों को बाहर निकालने की मांग की है।
नब्बे के दशक के शुरुआती दिनों में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के साथ ‘बांग्लादेशी निकालो’ आंदोलन चलाने वाले वरिष्ठ नेता मेवाराम आर्य बताते हैं कि उस आंदोलन का ही लाभ मिला कि भाजपा त्रिलोकपुरी, सीमापुरी, नंदनगरी, बाबरपुर, घोंडा और करावल नगर जैसी करीब दर्जन भर सीटें जीत पाई, जहां बड़ी तादात में बांग्लादेशी रहते थे।

भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में भी लगातार यह मुद्दा शामिल किया जाता रहा है। 1993 के विधानसभा चुनाव के बाद आज तक किसी विधानसभा या नगर निगम चुनाव में भाजपा को इतने वोट कभी नहीं मिले। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 46 फीसद मत मिले थे। ममगांई ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के 2003 में दिल्ली से अवैध बांग्लादेशियों को निर्वासित करने के आदेश के बावजूद दिल्ली पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की और दिल्लीवासियों की सुरक्षा संकट में डाल दी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने 2003 में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीसी पटेल और एके सीकरी की डिवीजन बैंच के समक्ष करीब 13 लाख अवैध बांग्लादेशियों के राजधानी में होने का शपथपत्र और चरणबद्ध तरीके से उन्होंने निकालने का आश्वासन दिया था। साल 1991 में ऑपरेशन फ्लश आउट और सितंबर 1992 में ऑपरेशन पूश बैक के अंतर्गत दिल्ली से अवैध बांग्लादेशियों को निर्वासित करने का कार्य शुरू हुआ था। इस कड़ी में 1993 में अवैध रूप से रह रहे लगभग 3 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। 15 सालों 4 से 5 हजार अवैध बांग्लादेशी ही निर्वासित किए गए जबकि राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र तक बन गए हैं और स्लम पुनर्वास कार्यक्रम के तहत झुग्गी के बदले प्लॉट भी पा गए हैं।

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