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आप का आरोप- BJP ने हमारे विधायक को दिया था चार करोड़ का लालच

पार्टी का कहना है कि भाजपा देश भर में अपने खिलाफ बन रहे माहौल से निराश और हताश है और गुजरात में हवा खिलाफ होती देख बौखलाहट में नेताओं को खरीदने की कोशिशों में जुट गई है।

Author नई दिल्ली | October 24, 2017 3:40 AM
आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष। (File Photo)

आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने उसके विधायक को खरीदने के लिए चार करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। यह मामला उजागर भी हो गया था लेकिन पुलिस ने आरोपी नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पार्टी का कहना है कि भाजपा देश भर में अपने खिलाफ बन रहे माहौल से निराश और हताश है और गुजरात में हवा खिलाफ होती देख बौखलाहट में नेताओं को खरीदने की कोशिशों में जुट गई है। पार्टी ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। ‘आप’ के नेता आशुतोष ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी के संगम विहार से विधायक दिनेश मोहनिया को भाजपा में शामिल होने के लिए प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष शेर सिंह डागर ने चार करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की थी।

उन्होंने बताया कि इसकी बाकायदा सीडी भी जारी की गई लेकिन पुलिस ने इस मामले में मुकदमा तक दर्ज करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ देश भर में बने माहौल की वजह से वह निराशा और हताशा के माहौल में बौखला गई है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की राजनीति करने के लिए भाजपा जानी जाती है, ठीक वही उसने अब गुजरात में किया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र पटेल नामक सामाजिक नेता को भाजपा द्वारा एक करोड़ रुपए की घूस देकर पार्टी में शामिल कराने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि ‘आप’ को शक है कि घूस देने की यह कोशिश भाजपा में ऊपरी स्तर से की गई है। लिहाजा इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जानी चाहिए।

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आशुतोष ने कहा कि भाजपा एक ओर जहां गुजरात में घूस देकर सामाजिक नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की कोशिश कर रही है तो दूसरी ओर राजस्थान की भाजपा सरकार तो एक अध्यादेश लाकर भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को बचाने की कवायद में लगी है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर क्यों सीबीआइ को तोता कहा जाता है और कैसे सरकार में बैठे लोग सीबीआइ का दुरुपयोग करते हैं। उसका एक और प्रमाण तब देखने को मिला जब नियुक्तियों से जुड़ी केंद्रीय मंत्रिमंडल की समिति ने एक ऐसे अफसर को सीबीआइ का विशेष आयुक्त नियुक्त कर दिया जिसकी विश्वसनीयता ही संदेह के घेरे में है। सीवीसी ने राकेश अस्थाना नामक अफसर की सीबीआइ में पदोन्नत्ति के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट दी थी।

 

 

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