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भाजपा समर्थित व्यापारी नेता भी जीएसटी के विरोध में

भाजपा समर्थित व्यापारी नेताओं का मानना है कि कई सामान पर करों का ढांचा गलत है, और जिस तरह से इसे जल्दबाजी में कारोबारियों पर लादा गया है, उससे आने वाले समय में व्यापारी मोदी सरकार से नाराज हो जाएंगे।

कश्मीरी गेट में आॅटोमोटिव पार्ट्स मार्किट एसोसिएशन के नेता नरेंद्र मदान भी भाजपा से जुड़े हुए हैं और राजधानी में व्यापारियों के नेता भी हैं। इनके बाजार में मोटर के पुर्जों का सामान बिकता है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से राजधानी के व्यापारियों को हो रही परेशानियों को देखते हुए अब भाजपा समर्थित व्यापारी भी केंद्र सरकार से नाराज हो रहे हैं। भाजपा समर्थित व्यापारी नेताओं का मानना है कि कई सामान पर करों का ढांचा गलत है, और जिस तरह से इसे जल्दबाजी में कारोबारियों पर लादा गया है, उससे आने वाले समय में व्यापारी मोदी सरकार से नाराज हो जाएंगे। फिलहाल राजधानी के ज्यादातर व्यापारियों को भाजपा का समर्थक माना जाता रहा है। व्यापारी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार सभी व्यापारियों को चोर समझ रही है। आए दिन व्यापारियों को लेकर नए-नए फरमान जारी हो जाते हैं। जिनसे व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाता है।

गुम है चांदनी चौक की चमक
जीएसटी की करों के विरोध में चांदनी चौक सहित देशभर का कपड़ा व्यापारी हड़ताल पर है। देश में सबसे बड़ा धंधा कपड़े का माना जाता है। हालात यह है कि चांदनी चौक में कपड़ा व्यापारियों की हड़ताल से सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां पर जीएसटी लागू होने के बाद से व्यापारियों की हड़ताल चल रही है। चांदनी चौक में कपड़ा व्यापारियों के दो बड़े नेता सुरेश बिंदल और सुमन कुमार गुप्ता हैं। सुरेश बिंदल देश के कपड़ा व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था देहली हिंदुस्तानी मर्कंटाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। सुमन कुमार गुप्ता चांदनी चौक से निगम पार्षद और यहां से जिला भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। भाजपा से जुड़े इन दोनों नेताओं की चांदनी चौक स्थित दुकानें बंद पड़ी हैं। दोनों हड़ताली कपड़ा व्यापारी बिरादरी के साथ हैं।

सूरत का असर दिल्ली तक
सुमन कुमार गुप्ता का कहना है कि उन्हें समाज में रहना है और वे अपनी बिरादरी के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? उनका कहना है कि सारा मसला गुजरात स्थित सूरत का है, जहां से देश भर में ज्यादातर कपड़ा आता है। सूरत में कपड़ा मिल मालिकों की हड़ताल को देखते हुए, देश के अन्य राज्यों में भी कपड़ा व्यापारी हड़ताल पर चले गए हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि जल्द ही हड़ताल खत्म होगी और कोई सर्वमान्य हल निकाल लिया जाएगा।

बरसात में बेधंधा हुआ तिरपाल
दिल्ली में भाजपा से जुड़े अन्य व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल, मनोहर लाल कुमार, नरेंद्र मदान, सत्येंद्र जैन, महेश सिंघल, कंवल कुमार बल्ली इन दिनों व्यापारियों की नाराजगी को देखते हुए दो रास्तों पर चल रहे हैं। ये लोग जीएसटी का तो समर्थन कर रहें हैं, साथ ही कुछ सामान की करों में बढ़ोत्तरी और व्यापारियों को हो रही परेशानियों को लेकर नाराज हैं। सदर बाजार स्थित आजाद बाजार में तिरपाल का सबसे बड़ा थोक बाजार है। बरसात के मौसम में इस धंधे में बहुत काम होता है जिससे व्यापारियों के पास बात करने तक का समय नहीं होता। लेकिन आज स्थिति यह है कि यहां दुकानदार खाली बैठे हुए हैं। सरकार ने तिरपाल पर जीएसटी 5 फीसद से बढ़ाकर 12 से 18 फीसद कर दिया है। तिरपाल भी कई तरह की हैं। एक में कपड़ा लगा होता है और दूसरे में प्लास्टिक होता है। दोनों पर अलग-अलग जीएसटी है। दिल्ली कैनवेस मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश सिंघल भाजपा से जुड़े माने जाते हैं। उनका कहना है कि तिरपाल समाज का सबसे कमजोर वर्ग इस्तेमाल करता है। उनका कहना है कि समाज के इस वर्ग की जरूरतों को देखते हुए सरकार को तिरपाल पर कर बढ़ाना ही नहीं चाहिए था। दिल्ली में तिरपाल का धंधा करने वाले करीब एक हजार व्यापारी हैं, जो इन दिनों खाली बैठे हुए हैं।

मोटर पुर्जा बाजार भी हताश
कश्मीरी गेट में आॅटोमोटिव पार्ट्स मार्किट एसोसिएशन के नेता नरेंद्र मदान भी भाजपा से जुड़े हुए हैं और राजधानी में व्यापारियों के नेता भी हैं। इनके बाजार में मोटर के पुर्जों का सामान बिकता है। यहां ज्यादातर सामानों पर जीएसटी बढ़ाकर 28 फीसद कर दिया गया है। यही कारण है कि लगातार व्यापारियों के धरने प्रदर्शन चलते आ रहे हैं। मदान का कहना है कि उनके यहां पर ज्यादातर छोटे व्यापारी हैं, जो सिर्फ पांच सात फुट लंबें चौड़े क्षेत्र में अपना कारोबार करते हैं। उनके व्यापार में अब बड़ी कंपनियां प्रवेश कर रहीं हैं। जिससे छोटे कारोबारियों का धंधा तो पहले से ही खत्म होता जा रहा था, पर अब जीएसटी में ज्यादा कर लगने से सभी का धंधा ही चौपट हो गया है।

भरोसे में ले सरकार
लगातार जीएसटी का समर्थन करते आ रहे, व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल ने व्यापारियों को आने वाली समस्याओं को देखते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों को व्यापार और वाणिज्य जगत के साथ मिलकर जीएसटी के मूल्यांकन के लिए बैठकें करनी चाहिए, और सभी जमीनी मुद्दों को समझने व उन्हें तर्कसंगत बनाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। खंडेलवाल का कहना है कि जीएसटी व्यापारियों पर लगना है, ऐसे में सरकार को उन्हें भरोसे में लेना ही होगा।

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