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पेंशन घोटाले का आरोप लगाकर आप कर रही है भाजपा को बदनाम: विजेंद्र गुप्ता

हम दिल्ली सरकार को चुनौती देते हैं कि वह सभी निगम पार्षदों से माफी मांगे।

Author नई दिल्ली | Published on: October 27, 2016 3:39 AM
नेता प्रतिपक्ष दिल्ली विधानसभा विजेंद्र गुप्ता

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय और विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर नगर निगमों में पेंशन घोटाले का आरोप लगाकर भाजपा को बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया है।  संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मंगलवार की हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि केंद्रीय सूचना आयुक्त ने पेंशन मामले में असंवैधानिक, गैरकानूनी और पहली नजर गलत आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी? सरकार ने सीआइसी के 13 मई 2016 के आदेश का दिल्ली में 15 मई को होने वाले 13 पार्षद सीटों के लिए मतदान के अवसर पर राजनीतिक फायदा उठाने के लिए 14 मई 2016 को पत्रकार वार्ता करके उत्तरी दिल्ली नगर निगम और पार्षद डॉक्टर शोभा विजेंद्र पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पेंशन वितरण मामले में करोड़ों का घोटाला किया है। ऐसा करके आम आदमी पार्टी और उसकी सरकार ने मतदान को प्रभावित किया था। पेंशन मामले में केजरीवाल सरकार ने उपचुनावों से पहले भाजपा को बदनाम करने की साजिश की और अब अदालत की ओर से सीआइसी के आदेश को स्टे किए जाने के बाद हम दिल्ली सरकार को चुनौती देते हैं कि वह सभी निगम पार्षदों से माफी मांगे।

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विपक्ष के नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में उनपर आरोप लगाया था कि भाजपा करोड़ों रुपए का पेंशन घोटाला कर रही है। मुख्यमंत्री का यह आरोप अदालत ने कल खारिज कर दिया। इन आरोपों के गलत साबित होने की वजह से दिल्ली सरकार की विश्वसनीयता समाप्त हो गई है। न्यायाधीश ने दिल्ली सरकार और सीआइसी को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि सीआइसी ने अधिकारों से बाहर जाकर हाई कोर्ट की तरह आदेश पारित किए हैं जिसका उसे कोई संवैधानिक अधिकार ही नहीं है। ऐसा करके सीआइसी ने वादी के पक्ष सुने जाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया।
सीआइसी ने आदेश पारित करके कहा था कि किसी भी वरिष्ठ नागरिक या विकलांग को पेंशन की संस्तुति करने पर पार्षद व्यक्तिगत ढंग से जिम्मेदार होगा और किसी भी प्रकार के दंड का भागी होगा। जबकि कानून के अनुसार किसी भी विकलांग, बुजुर्ग, विधवा आदि को पेंशन देने के लिए नगर निगम का समुदाय सेवा विभाग ही जिम्मेदार होता है। पार्षद सिर्फ पेंशन के कागजात प्रमाणित करके पेंशन की संस्तुति करता है। इस मामले में पार्षद को दोषी ठहराना कानूनीरूप से गलत है।

 

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