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राहुल गांधी के साथ काम करना चाहते हैं तेजस्‍वी यादव, पर पीएम दावेदारी पर टाल गए जवाब

जब तेजस्वी से पूछा गया कि क्या अखिलेश और मायावती राहुल गांधी को पीएम स्वीकार करेंगी, तो उन्होंने कहा, "राहुल गांधी कह चुके हैं कि यदि कांग्रेस चुनाव नतीजों के बाद सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती है तो कांग्रेस अपनी दावेदारी पेश करेगी।"

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा है कि वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मिलकर लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि जब तेजस्वी यादव से पूछा गया कि क्या वो 2019 में राहुल गांधी को विपक्ष के पीएम कैंडिडेट के रुप में देखते हैं तो तेजस्वी यादव ने कहा कि पीएम पद के लिए कई उम्मीदवार विपक्षी खेमे मे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्हें खुशी है कि विपक्ष को अब समझ में आ गया है कि उन्हें एकजुट रहना चाहिए। एनडीटीवी के साथ एक बातचीत में उन्होंने गोरखपुर, फूलपुर और कैराना उपचुनावों का जिक्र करते हुए कहा, “इस गठबंधन के बाद आप वहां के नतीजे देख सकते हैं।” उन्होंने कहा कि बिहार की जोकिहाट सीट पर आरजेडी की जीत भी इसी समीकरण का नतीजा है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या अखिलेश और मायावती राहुल गांधी को पीएम स्वीकार करेंगी, तो उन्होंने कहा, “राहुल गांधी कह चुके हैं कि यदि कांग्रेस चुनाव नतीजों के बाद सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती है तो कांग्रेस अपनी दावेदारी पेश करेगी।” आगे उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं जो कोई राजनीतिक दल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरता है, वह पीएम पोस्ट के लिए अपनी दावेदारी ठोकेगा, यदि आप विपक्ष की ओर देखते हैं, तो आप पाएंगे कि कई लोग पीएम बनने के काबिल हैं।” हालांकि उन्होंने कहा कि पीएम पद का उम्मीदवार गौण मुद्दा है, इस वक्त अहम जिम्मेदारी है संविधान को बचाने की। बता दें कि पिछले सप्ताह राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने दिल्ली में 40 मिनट तक मुलाकात की थी। सूत्रों ने कहा कि दोनों नेताओं ने बिहार और देश की राजनीतिक हालात पर चर्चा की थी। इस मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने ट्वीट भी किया था। इससे पहले नवंबर 2017 में भी दोनों नेता मुलाकात कर चुके हैं।

बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार के शपथ ग्रहण के दौरान कांग्रेस के बुलावे पर तेजस्वी यादव बैंगलुरु पहुंचे थे। यहां पर तेजस्वी ने अखिलेश, मायावती, हेमंत सोरेन समेत विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की थी। विपक्षी दलों के इस जमावड़े के बाद 2019 में विपक्ष के एकजुट होकर सत्ता के खिलाफ चुनाव लड़ने की चर्चाएं सामने आ रही है।

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