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दिल्ली से नीतीश कुमार की हुंकार- हमें कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता, NDA के साथ ही रहने के दिये संकेत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। नीतीश ने कहा कि उनकी पार्टी को नजरअंदाज करेगा, राजनीति उन्हें खुद नजरअंदाज कर देगी।

दिल्ली में जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मौजूद नीतीश कुमार, केसी त्यागी और दूसरे नेता (फोटो-पीटीआई)

जनता दल यूनाईटेड 2019 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर लड़ेगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। नीतीश ने कहा कि जो उनकी पार्टी को नजरअंदाज करेगा, राजनीति उन्हें खुद नजरअंदाज कर देगी। नीतीश कुमार ने कहा कि बीजेपी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। हालांकि सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक जेडीयू ने 2019 का आम चुनाव एनडीए के साथ लड़ने का मन बना लिया है। जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अब 12 जुलाई को पटना में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सीट बंटवारे चर्चा होगी। रविवार (8 जुलाई) को दिल्ली में जनता दल यूनाईटेड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद जेडीयू के महासचिव संजय झा ने कहा कि पार्टी ने चुनाव से जुड़े सभी राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को दिया गया है।

जेडीयू ने आरजेडी के साथ जाने की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया। सीट बंटवारे के लिए बीजेपी के साथ तनातनी की खबरों को जेडीयू ने अटकलबाजी करार दिया। बता दें कि जेडीयू 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए जेडीयू 2009 लोकसभा चुनाव के नतीजों को आधार मान कर सीटों के बंटवारे की मांग कर रही है। हालांकि अब जेडीयू का मन अब बदलता नजर आ रहा है। नीतीश कुमार ने कहा कि उनके लिए बिहार के विशेष राज्य का दर्जा अहम है। जेडीयू नेता केसी त्यागी कांग्रेस पर भी बरसे। केसी त्यागी ने कहा, “जब तक कांग्रेस एक आरजेडी जैसी एक भ्रष्ट पार्टी को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं करती है, हम नहीं कह सकते हैं कि ऐसी पार्टी के साथ किस तरह से बात की जाए।”

नीतीश कुमार की पार्टी ने एक राष्ट्र, एक चुनाव का भी समर्थन किया। के सी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी एक राष्ट्र एक चुनाव फार्मूले का समर्थन करती है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी इस पहल का समर्थन करती है, हालांकि हम समझते हैं कि इसे लागू कर पाना आसान नहीं होगा। लेकिन हम इसका विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि इसका मकसद खर्चे कम करना, कालेधन पर चोट और बेहतर प्रशासन देना है।

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