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दिल्ली के अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सरकार की मंजूरी बिना निजी स्कूल नहीं बढ़ा सकेंगे फीस

जस्टिस अनिलदेव सिंह कमिटी ने कहा था कि विशेष स्थितियों में प्राइवेट स्कूल अधिकतम 10 फीसदी तक फीस बढ़ा सकते हैं।

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एक निजी स्कूल में बच्चे का दाखिला कराने के लिए लाइन में अभिभावक लगे हुए। (एक्सप्रेस फोटो-कमलेश्वर सिंह)

सुप्रीम कोर्ट ने आज (23 जनवरी को) दिल्ली के अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। निजी स्कूलों की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार की अनुमति के बिना स्कूल फीस नहीं बढ़ाया जा सकता है। कोर्ट ने अपने टिप्पणी में कहा कि दिल्ली में चल रहे प्राइवेट स्कूलों को अब जब भी फीस बढ़ानी होगी उन्हें दिल्ली सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही प्राइवेट स्कूलों को अब ये भी बताना होगा कि वे कितने फीसदी फीस बढ़ाना चाहते हैं और क्यों? कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि जब आपने सरकार के नियमों के मुताबिक ही स्कूल की मान्यता हासिल की, डीडीए की जमीन हासिल की तो उसके नियमों के मुताबिक ही आपको फीस भी बढ़ानी होगी।

कोर्ट में दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि फीस बढ़ोतरी को लेकर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनिल देव सिंह कमेटी का गठन किया था, इस कमिटी ने कहा था कि विशेष स्थितियों में प्राइवेट स्कूल अधिकतम 10 फीसदी तक फीस बढ़ा सकते हैं लेकिन ज्यादातर प्राइवेट स्कूल सामान्य स्थितियों में भी 10 फीसदी तक फीस वृद्धि करते आ रहे हैं।

इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट अनएडिड माइनॉरिटी स्कूलों के लिए दिल्ली सरकार द्वारा 7 जनवरी को जारी नर्सरी एडमिशन नोटिफिकेशन को गैर जरुरी बताते हुए उस पर रोक लगा दी थी। यह आदेश डीडीए की जमीन पर बने अनएडिड माइनॉरिटी प्राइवेट स्कूलों को लेकर जारी किया गया था। इन स्कूलों पर नर्सरी एडमिशन को लेकर दिल्ली सरकार का नोटिफिकेशन लागू नहीं होगा।

सरकार ने इन स्कूलों के लिए दूरी को क्राइटीरिया बनाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि माइनॉरिटी स्कूल के लिए नेबरहुड क्राइटेरिया जरुरी नहीं है, इसलिए सरकार माइनॉरिटी स्कूलों से उनकी स्वायत्ता नहीं छिन सकती है। माइनॉरिटी अनएडिड प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि सरकार का नोटिफिकेशन संविधान के आर्टिकल 15 के क्लॉज़ 5 का उल्लंघन है।

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