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नीला हुआ जंतर-मंतर, राजधानी पहुंची ‘भीम सेना’

सहारनपुर में मई के पहले हफ्ते में शुरू हुए जातीय संघर्ष कीआवाज अब दिल्ली पहुंची।

Author नई दिल्ली | Published on: May 22, 2017 12:55 AM
दलित समर्थक संगठन ‘भीम आर्मी’ के बैनर तले हजारों की तादाद में दलित आंदोलनकारियों ने रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

सहारनपुर में मई के पहले हफ्ते में शुरू हुए जातीय संघर्ष कीआवाज अब दिल्ली पहुंची।दलित समर्थक संगठन ‘भीम आर्मी’ के बैनर तले हजारों की तादाद में दलित आंदोलनकारियों ने रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित क ो दस लाख रुपए मुआवजा देने व दलित नेता चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने की मांग की। हिंसा भड़कने के बाद से भूमिगत नेता आजाद अचानक जब जंतर-मंतर पहुंचे तो उनके समर्थन में लगे नारों से पूरा माहौल गूंज उठा। साथ ही समर्थक जोश से भर कर देर तक तालियां बजाते रहे। पूरा जंतर-मंतर नीली टोपी व नीले झंडों से पटा पड़ा था। इस प्रदर्शन को पुलिस की ओर से मंजूरी नहीं मिली थी। बावजूद इसके लोग पहुंचे। इस बारे में पुलिस की मंजूरी न देने की बाबत दलील है कि चूंकि 50 हजार लोगों के आने की अनुमति मांगी गई थी, इसलिए कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए मंजूरी नहीं दी गई थी। लेकिन बाद में करीब पांच हजार लोगों के पहुंचने की सूचना पर धरना होने दिया गया।

विरोध प्रदर्शन को भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद, जेएनयू के पूर्व छासंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार व गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मवानी डॉ. मृगांक, शेहला रशीद, बहुजन संघर्ष दल के फूलसिंह बरैया समेत कई लोगों ने संबोधित किया। आजाद ने कहा कि कि 5 मई को शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप की शोभा यात्रा के दिन पिछड़े और सवर्ण तबके के बीच विवाद शुरू हुआ जिसके बाद हजारों की संख्या में पहुंचे सवर्ण तबके के लोगों ने दलितों के घरों में आग लगा दी। इस हिंसा में एक सवर्ण तबके के युवक की मौत हो गई थी और कई पिछड़े तबके के युवा घायल हो गए थे। पिछड़े तबके के घर जला दिए गए थे। युवक की मौत के बाद सवर्णों ने बड़ी बेरहमी से पिछड़ों को निशाना बनाया। इसके बाद हिंसा और भड़क उठी लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इस आगजनी के बाद से पुलिस ‘भीम आर्मी’ के लोगों को निशाना बना रही है। नेताओं ने कहा कि पुलिस व प्रशासन सरकार के इशारे पर दलितों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि हमने घटना में पीड़ितों को मुआवजा मिले इसको लेकर पिछड़े तबके के पक्ष में 9 मई को महापंचायत बुलाई थी जिसको पुलिस रोकना चाहती थी। तब से पुल्२िास और भीम आर्मी में विवाद और गहरा गया। पुलिस का आरोप है कि भीम आर्मी ने आगजनी की और पुलिस को भी परेशान किया।

अखिल भारतीय दलित मुसलिम महासंघ के राष्टीÑय अध्यक्ष सुरेश कन्नौजिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अगड़े वर्ग के नेता के मुख्यमंत्री होने की वजह से इस वर्ग के लोग निरंकुश हो उठे हैं। इन नेताओं ने मांग की कि सहारनपुर पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सहारनपुर दलित समुदाय के जंतर-मंतर पर धरने में शामिल होकर उन्हें अपना समर्थन दिया।

 

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