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पश्चिम बंगाल: बिहार की शराबबंदी को भुनाने में जुटी राज्य सरकार

दरअसल, राज्य सरकार की इस पूरी कवायद के केंद्र में है अल्कोहल। वर्ष 2017-18 में राज्य के कुल राजस्व में अल्कोहल से मिलने वाले करों का हिस्सा 19 फीसद था। आबकारी से राज्य को मिलने वाला राजस्व हाल को वर्षों में तेजी से बढ़ कर 8,700 करोड़ तक पहुंच चुका है।

बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी है। (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने देर से ही सही लेकिन पड़ोसी बिहार में हुई शराबबंदी को भुनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत उसने बिहार से सटे शहरों में बड़े पैमाने पर शादी-ब्याह के आयोजन स्थलों या भवनों के निर्माण की योजना बनाई है ताकि उससे सटे बिहार के विभिन्न इलाकों के लोग यहां आकर शादी-ब्याह में जाम छलका सकें। राज्य के परिवहन मंत्री गौतम देब कहते हैं कि बिहार में शराबबंदी होने के बाद वहां के कई परिवार अपने पैतृक निवास की बजाय शादी-ब्याह के लिए उत्तर प्रदेश में बनारस, झारखंड में कोडरमा या रांची जा रहे हैं। उनमें सैकड़ों लोग कोलकाता भी आ रहे हैं। लेकिन यहां तक आना-जाना और महानगर में शादी समारोह का आयोजन एक महंगा सौदा है और ज्यादा लोग इसका खर्च नहीं उठा सकते। देब कहते हैं कि अगर हम पूर्वी बिहार से सटे इलाकों में सस्ती कीमत पर आयोजन स्थल मुहैया करा सकें तो उस इलाके के कई परिवार कम खर्च पर शादी के लिए बंगाल आ जाएंगे। इसमें दोनों का फायदा है।

बिहार के उन परिवारों को जहां शराबबंदी की परवाह किए बिना जश्न मनाने का मौका मिल जाएगा वहीं राज्य सरकार को भी राजस्व की आमदनी हो जाएगी। ममता बनर्जी सरकार ने अपनी इस कवायद के तहत छह शहरों को चुना है। ये हैं उत्तर जिनाजपुर जिले में दालखोला, करणदिघी व रायंगज और पश्चिम बर्दवान में रानीगंज, आसनसोल और दुर्गापुर। एक सरकारी अधिकारी बताते हैं कि शादी समारोहों के लिए बनने वाले इन भवनों के प्रबंधन व रखरखाव का जिम्मा राज्य के पर्यटन विभाग पर होगा। पर्यटन विभाग निजी पर्यटन एजंसियों के जरिए कमीशन के आधार पर बिहार से वर-वधू पक्ष को बंगाल में आकर शादी-ब्याह करने के लिए लुभाएगा।

पर्यटन विभाग के सूत्रों का कहना है कि इन आयोजन स्थलों पर बार लाइसेंस के साथ ही विशाल हाल, बारातियों के ठहरने के लिए कमरे, लान और दूसरी आधारभूत सुविधाएं मुहैया होंगी। बिहार के किशनगंज से सटे उत्तर दिनाजपुर जिले में करणदिघी के तृणमूल कांग्रेस विधायक मनोतोष देब कहते हैं कि ऐसी परियोजना से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा। इससे साज-सज्जा, फूलों की सप्लाई और कैटरिंग के कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। वैसे, बिहार में शराबबंदी के बाद से ही उत्तर दिनाजपुर में शराब की बिक्री कई गुनी बढ़ गई है। देब बताते हैं कि पहले होली व दिवाली जैसे त्योहारों पर ही बिहार से शराब पीने वाले इलाके में आते थे। लेकिन अब हर सप्ताहांत के दौरान ऐसे लोगों बड़ी संख्या में आते हैं। वे बताते हैं कि इस बढ़ती भीड़ के कारण ही बीते दो वर्षों के दौरान इलाके में कई नए टूरिस्ट लाज और बार खुल गए हैं।

राजस्व पर है निगाह

दरअसल, राज्य सरकार की इस पूरी कवायद के केंद्र में है अल्कोहल। वर्ष 2017-18 में राज्य के कुल राजस्व में अल्कोहल से मिलने वाले करों का हिस्सा 19 फीसद था। आबकारी से राज्य को मिलने वाला राजस्व हाल को वर्षों में तेजी से बढ़ कर 8,700 करोड़ तक पहुंच चुका है। वित्त मंत्री अमित मित्र ने वर्ष 2018-19 के दौरान इस मद में होने वाली आय में 82 फीसद वृद्धि का भरोसा जताया है। सरकारी अधिकारियों की दलील है कि ऐसे आयोजन स्थलों पर शादियों के अलावा कारपोरेट पार्टियों और जन्मदिन समारोहों का भी आयोजन किया जा सकता है।

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