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दिल्ली: राजनीतिक दलों में बवाना सीट उपचुनाव जीतने के लिए होड़

फरवरी 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद यह दूसरा उपचुनाव है, जिसे तीनों ही बड़े दल जीतना चाहेंगे।

Author नई दिल्ली | Published on: August 6, 2017 3:59 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

दिल्ली विधानसभा की बवाना सीट पर 23 अगस्त को होने वाला उपचुनाव तीनों बड़े दलों के लिए चुनौती साबित हो सकता है। यह सीट आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक वेदप्रकाश के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए थे। इस बार भाजपा ने उन्हें ही इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया है।
वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर पहले से ही विधायक रहे सुरेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाया है। आप ने यहां से रामचंद्र को उम्मीदवार बनाया है। यह चुनाव इन तीनों दलों के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि जो भी उम्मीदवार यहां से जीतेगा, उसकी पार्टी आने वाले समय में यह प्रचार करेगी कि दिल्ली में माहौल उसके पक्ष में है। बवाना आरक्षित सीट है और यहां कुल 2,89000 लाख मतदाता हैं। यहां पर 389 मतदान केंद्र हैं। यहां पर भाजपा के चार निगम पार्षद हैं। बवाना उपचुनाव की तारीख का एलान होते ही दिल्ली में सियासी जंग शुरू हो गई है। वैसे बवाना उपचुनाव में जीत हार से दिल्ली सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की साख जरूर दांव पर लगी है।

यह उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा के लिए भी अहम है, क्योंकि यह जीत तीनों ही दलों के कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने का काम करेगी। कांग्रेस ने तो यहां पर फिर से तीन बार चुनाव जीते सुरेंद्र कुमार को मैदान में उतारा है। उनके समर्थन में बाहरी दिल्ली के कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार जमकर प्रचार कर रहे हैं। फरवरी 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद यह दूसरा उपचुनाव है, जिसे तीनों ही बड़े दल जीतना चाहेंगे। इससे पहले राजौरी गार्डन उपचुनाव में भाजपा-अकाली गठबंधन को जीत मिली थी, जबकि आप के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं, कांग्रेस ने अपने पुराने वोटबैंक को वापस पाने में सफलता पाई थी। माना जा रहा है कि अगर भाजपा यह सीट जीतती है, तो 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में उसके पक्ष में माहौल बनेगा। निगम चुनाव में मनमाफिक नतीजा नहीं मिलने के बाद आप इस सीट को गंवाना नहीं चाहती। इसीलिए अरविंद केजरीवाल ने उस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आप सरकार इन दिनों जगह-जगह प्रचार कर रही है कि अगर वह यहां से चुनाव जीतती है, तो इस विधानसभा में विकास कार्य करवाए जाएंगे। इस सीट पर 7 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अगस्त तक नाम वापस लिया जा सकता है। मतदान 23 अगस्त को होगा और वोटों की गिनती 28 अगस्त को होगी। इस सीट पर आप के विधायक वेदप्रकाश ने इस्तीफा दे दिया था और वे भाजपा में शामिल हो गए थे।

 

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