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‘रामदेव के सुरक्षा खर्च का आकलन करना मुश्किल है’

योग और व्यापार की बारीकियों को समझने वाले योगगुरु बाबा रामदेव की सुरक्षा पर केंद्र और राज्य की सरकारें कितना खर्च कर रही हैं, इसका आकलन मुश्किल है।

गजेंद्र सिंह

योग और व्यापार की बारीकियों को समझने वाले योगगुरु बाबा रामदेव की सुरक्षा पर केंद्र और राज्य की सरकारें कितना खर्च कर रही हैं, इसका आकलन मुश्किल है। एक आरटीआइ के सवाल में रामदेव को मुहैया कराई गई सुरक्षा पर होने वाले खर्च का ब्योरा मांगे जाने पर गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। हालांकि यह जानकारी भी तब मिली, जब प्रथम अपीलीय अधिकारी के अधीन अपील दायर की गई। पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया गया था। गृह मंत्रालय में आरटीआइ दायर करने वाले बरेली के आरटीआइ कार्यकर्ता मुहम्मद खालिद जीलानी बताते हैं कि 2014 में राजग सरकार बनने के बाद उनको जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने की बात सामने आई थी।

इसके बाद 14 मार्च 2018 को आरटीआइ दाखिल कर जानकारी मांगी गई कि रामदेव को किस कानून और नियम के तहत किस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। जीलानी ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा पर खर्च होने वाली मद सहित धनराशि और पांच वर्षों में सुरक्षा पर खर्च का ब्योरा मांगा था। 28 मार्च को आए जवाब में बताया गया कि किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा तब मुहैया कराई जाती है जब उसके खतरे का आकलन केंद्रीय सुरक्षा एजंसियां करती हैं। इसके अलावा उन्होंने आरटीआइ की धारा 8(1)(जी), 8(1)(आइ) और 24(1) के तहत निजी जानकारी देने से इनकार कर दिया।

जीलानी बताते हैं कि जानकारी व्यक्तिगत न होकर लोकधन से जुड़ी थी, इसलिए गृह मंत्रालय के प्रथम अपीलीय अधिकारी से अपील की गई। इसके बाद 17 अप्रैल को मिली जानकारी के मुताबिक, उन्होंने खर्च के बारे में बताया कि यह ठीक से निर्धारित कर पाना काफी कठिन है। सुरक्षा में लगे कर्मियों के वेतन, भत्ते, संचार और परिवहन के खर्च इसमें शामिल होते हैं। यह अलग-अलग सुरक्षा एजंसियों के बजट पर आधारित है। यही नहीं, राज्य सरकार भी सुरक्षा पर खर्च करती है। इसलिए यह जानकारी केंद्रीकृत रूप में एकत्र नहीं की जाती है। इसलिए, सुरक्षा पर होने वाले खर्च का आकलन मुश्किल है। जीलानी का कहना है कि इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए एक आरटीआइ उत्तराखंड पुलिस को भी भेजी गई थी, लेकिन वहां इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी।

जीलानी बताते हैं कि उन्होंने मई 2018 में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के सुरक्षा खर्च के बारे में जानकारी मांगी थी तो गृह मंत्रालय की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार की ओर से श्रीश्री रविशंकर को किसी भी श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।