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दिल्ली में अधिकारों की जंग: आप सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

इस अपीलों में आप सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उप राज्यपाल को राष्ट्रीय राजधानी का प्रशासनिक प्रमुख बताया गया गया है।

Author नई दिल्ली | Published on: September 9, 2016 5:07 PM
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

अरविंद केजरीवाल नीत आप सरकार की ओर से दायर की गई छह अपीलों पर शुक्रवार (8 सितंबर) को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र का जवाब मांगा है। इस अपीलों में आप सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उप राज्यपाल को राष्ट्रीय राजधानी का प्रशासनिक प्रमुख बताया गया गया है। न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना की पीठ ने उच्च न्यायालय के चार अगस्त के फैसले के संचालन पर रोक लगाने से इनकार किया और कहा कि वह मामले को 15 नवंबर को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे। अपीलों पर जवाब देने के लिए पीठ ने केंद्र सरकार को छह हफ्ते का वक्त दिया है। पीठ ने उस तर्क को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि उप राज्यपाल ने दिल्ली सरकार के पुराने फैसलों को देखने के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन का जो फैसला लिया है, उस पर रोक लगनी चाहिए। तर्कों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह इन याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजने पर विचार कर सकती है।

केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अनेक प्राथमिक आपत्तियां कीं और विभिन्न आधारों पर अपील रद्द करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि याचिका के पक्ष में हलफनामे पर सचिव नहीं बल्कि उप मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर हैं। रोहतगी ने कहा, ‘इस याचिका को तो केवल इसी आधार पर खारिज कर दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ पहले ही इस मामले पर गौर कर चुकी है दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बताया है। दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने कहा कि मंत्री को हलफनामे पर दस्तखत अदालत के उस फैसले के कारण करने पड़े जिसमें कहा गया है कि सरकार के हर फैसले में उप राज्यपाल की पूर्व अनुमति होनी जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘कोई भी सरकारी कर्मचारी इन दस्तावेजों पर दस्तखत करने के लिए तैयार नहीं था।’

दिल्ली सरकार ने अपीलों की जल्द सुनवाई की मांग की थी जिसके बाद इन पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। दिल्ली सरकार ने दो सितंबर को उच्चतम न्यायालय को बताया था कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए उसने छह भिन्न याचिकाएं दायर की हैं और राष्ट्रीय राजधानी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर जो दीवानी मुकदमा दायर किया था उसे वापस ले लिया है। न्यायालय ने आप सरकार को दीवानी मुकदमा वापस लेने की इजाजत दे दी थी। साथ ही इसमें शामिल मुद्दों को विशेष अनुमति याचिकाओं में उठाने की मंजूरी भी दे दी थी। शीर्ष अदालत ने आप सरकार से पिछले महीने पूछा था कि दिल्ली को केंद्र शासित और उप राज्यपाल को उसका प्रशासनिक प्रमुख बताए जाने के उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ क्या वह अपील दायर करेगी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि दिल्ली सरकार को विशेष अनुमति याचिका दायर करनी होगी क्योंकि दीवानी मुकदमा ‘निष्फल’ हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र ने आप सरकार की याचिका का यह कहते हुए जोरदार विरोध किया है कि वह एक ही मामले में राहत के लिए समानांतर उपाय नहीं कर सकती है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने संविधान के तहत दिल्ली के केंद्र शासित दर्जे को कायम रखते हुए उप राज्यपाल को इसका प्रशासनिक प्रमुख बताया था। उच्च न्यायालय ने चार अगस्त को अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली से संबंधित विशेष संवैधानिक नियम के अनुच्छेद 239 एए के कारण केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित अनुच्छेद 239 का प्रभाव ‘कम’ नहीं होगा इसलिए प्रशासनिक मामलों में उप राज्यपाल की मंजूरी ‘अनिवार्य’ है।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में आप सरकार के उस तर्क को अस्वीकार कर दिया था जिसमें उसने कहा था कि विधानसभा द्वारा अनुच्छेद 239एए के तहत बनाए गए नियमों के मुताबिक उप राज्यपाल को मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह और सहयोग पर काम करना होता है। लेकिन न्यायालय ने इस तर्क को ‘आधारहीन’ माना। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के लगभग सभी तर्कों को खारिज कर दिया था लेकिन उसकी इस बात पर सहमति जताई कि विशेष सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के मामले में उप राज्यपाल को उसकी सलाह और सहयोग पर ही काम करना होगा।

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