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महिला आयोग विवाद: अब ‘जंग’ मालीवाल की तैनाती पर

केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के टकराव के सिलसिले में दिल्ली महिला आयोग का नाम भी जुड़ गया है। 20 जुलाई को मुख्यमंत्री केजरीवाल की सलाहकार..

Author July 23, 2015 9:09 AM
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल

केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग के टकराव के सिलसिले में दिल्ली महिला आयोग का नाम भी जुड़ गया है। 20 जुलाई को मुख्यमंत्री केजरीवाल की सलाहकार(जनता संवाद) स्वाति मालीवाल के महिला आयोग अध्यक्ष का पद भार लेने के दूसरे ही दिन उपराज्यपाल ने उनकी तैनाती पर सवाल उठा दिया है। बुधवार को यह संदेश राजनिवास (उपराज्यपाल दफ्तर) से दिल्ली महिला आयोग की सदस्य सचिव अर्चना अरोड़ा को भी दे दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, अरोड़ा ने बिना अधिसूचना के स्वाति के पास कोई फाइल भेजने से इनकार कर दिया। अधिसूचना के सवाल पर मालीवाल का कहना था कि संभव है, मामूली कमी रह गई हो, उसे ठीक कर लिया जाएगा। उन्हें तो मुख्यमंत्री ने जो जिम्मेदारी दी है उसे वे पूरा करने का भरसक प्रयास करेंगी।

दिल्ली के विधान में महिला आयोग, दिल्ली खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष पद को लाभ का पद न मानते हुए इन पदों पर विधायकों की नियुक्ति होती रही है। खादी आयोग के अध्यक्ष पद पर तो केजरीवाल सरकार ने अपने एक विधायक महेंद्र यादव को नियुक्त किया है। लेकिन महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर सरकार ने आप की छह महिला विधायकों में से किसी एक को उस पद पर लाना ठीक नहीं समझा।

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दिल्ली महिला आयोग की निवर्तमान अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह का कहना था कि आप की सरकार ने अपने पिछले 49 दिनों के कार्यकाल में इस पद पर वरिष्ठ साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा को नियुक्त करने के लिए उपराज्यपाल से इजाजत मांगी थी। उन्होंने बरखा सिंह का कार्यकाल बाकी होने का हवाला देकर इजाजत नहीं दी। इस बार जान-बूझकर सरकार ने बिना उपराज्यपाल की इजाजत के स्वाति की नियुक्ति की, जिससे विवाद हो।

अपने आठ साल के लंबे कार्यकाल से संतुष्ट बरखा सिंह ने आज फिर दोहराया कि आप की सरकार और उस पार्टी के दो बड़े नेता कुमार विश्वास और सोमनाथ भारती ने आयोग की गरिमा घटाने का काम किया। स्वाति केजरीवाल के साथ इंडिया अगेंस्ट करप्शन के समय से जुड़ी हैं। वे हरियाणा के आप नेता नवीन जयहिंद की पत्नी हैं। अध्यक्ष बनने से पहले वे केजरीवाल की सलाहकार थीं। महिला आयोग में तो अध्यक्ष को वाहन और गिनती के भत्ते के अलावा कोई वेतन आदि नहीं मिलता है, जबकि उन्हें सलाहकार के नाते हर महीने वेतन मिलता है।

मंगलवार को राजनिवास से मुख्यमंत्री दफ्तर में बिना इजाजत नियुक्ति करने के सवाल पर अभी तक कोई जवाब भेजे जाने की जानकारी नहीं मिल पाई है। आयोग के दफ्तर में नए अध्यक्ष या उनके साथ बनाए गए तीनों सदस्यों के कल से बैठने पर तो कोई समस्या नहीं होने वाली है। लेकिन विधिवत नियुक्ति के बिना वे सरकारी काम नहीं कर पाएंगी। कायदे से आयोग के पास ज्यादा वैधानिक अधिकार नहीं हैं और इसे सामाजिक काम की तरह ही अब तक करने की परंपरा रही है। यही दावा नई अध्यक्ष भी कर रही हैं। लगता है कि दिल्ली में बढ़ते महिला अपराध के साथ-साथ 28 जुलाई की विधानसभा की बैठक का एक मुद्दा यह भी बनने वाला है।

बहरहाल इस विवाद पर स्वाति ने संवाददाताओं से कहा कि मैं समझती हूं कि इसमें मामूली तकनीकी गड़बड़ी है क्योंकि कहा गया है कि वह फाइल मेरी नियुक्ति को लेकर उपराज्यपाल के कार्यालय नहीं भेजी गई। मुझे लगता है कि इसका समाधान कर लिया जाएगा। यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा मेरी नियुक्ति को लेकर अधिसूचना वापस लेने पर हमें इसका पालन करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पद की पात्रता के लिए उनकी पहचान को देखते हुए उपराज्यपाल अपनी मंजूरी प्रदान कर देंगे।

स्वाति ने कहा कि वे उपराज्यपाल के कार्यालय की ‘संवैधानिकता’ का सम्मान करती हैं और उम्मीद करती हैं कि इस ‘मामूली’ मुद्दे का समाधान कर लिया जाएगा। मेरा उपराज्यपाल कार्यालय या दिल्ली सरकार से इस मामले पर कोई संवाद नहीं हुआ है। मैं अपना काम कर रही हूं। मैं अपना काम करना जारी रखूंगी, भले ही मैं इस पद पर रहूं या नहीं रहूं।

इस बीच कांग्रेस और भाजपा ने उनकी नियुक्ति का विरोध किया है। विपक्ष ने स्वाति के चयन को ‘ भाई-भतीजावाद’ करार देते हुए इसकी आलोचना की है जबकि आप का कहना है कि उनका चयन पूरी तरह से ‘योग्यता’ के आधार पर किया गया। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने जयहिंद और केजरीवाल के संबंधी होने का दावा करने वाली रिपोर्टों का हवाला देते हुए प्रश्न किया कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री इस पद के लिए स्वाति पर विचार करके ‘जय हिंद कांग्रेस की जीजाजी परंपरा’ को आगे बढ़ा रहे हैं।

कांग्रेस ने कहा था कि भाई-भतीजावाद और पक्षपात की आलोचना करने वाली ‘आप’ अपनी पार्टी के कुछ सदस्यों को आगे बढ़ाने के लिए इसी मार्ग पर आगे बढ़ रही है।

(मनोज मिश्र)

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