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पार्टी में कलह के खतरे के बाद बदले केजरीवाल के सुर, कहा हार के लिए ईवीएम नहीं, हमारी गलतियां जिम्मेदार

आम आदमी पार्टी के अंदर ही ईवीएम से ‘छेड़छाड़’ के मुद्दे को छोड़ने के विवाद के बीच केजरीवाल ने कहा कि बहानों की नहीं, काम करने की जरूरत है।

Author नई दिल्ली | April 30, 2017 1:23 AM
दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

कुल पांच साल के राजनीतिक जीवन में एक बार और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने फैसले को गलत मानते हुए दिल्ली नगर निगमों के चुनाव में पार्टी की हार को स्वीकार कर लिया। हालांकि अभी भी जमीन पर आकर लोगों से सीधा संवाद करने के बजाय उन्होंने ट्विटर पर कहा कि पार्टी को अपनी गलतियों को सुधारने और आत्मावलोकन करने की जरूरत है। अभी तक आम आदमी पार्टी के नेता चुनाव में हार के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को दोषी ठहरा रहे थे। पर पंजाब, गोवा के विधानसभा चुनावों, राजौरी गार्डन विधानसभा के उपचुनाव और उसके बाद दिल्ली नगर निगम की हार से आप में भारी कलह शुरू होने के संकेत मिलने लगे थे। एक-एक करके आप के कई नेता हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़े जाने के खिलाफ आवाज उठाने लगे, तो केजरीवाल को पार्टी के वजूद पर खतरा दिखने लगा और उन्होंने अपनी भाषा बदल ली।

केजरीवाल ने कहा कि ‘स्वयंसेवकों और मतदाताओं’ से बातचीत के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी ने गलतियां कीं और अब हमें अपने काम के लिए फिर से ‘रूपरेखा’ बनाने की जरूरत है। आम आदमी पार्टी के अंदर ही ईवीएम से ‘छेड़छाड़’ के मुद्दे को छोड़ने के विवाद के बीच केजरीवाल ने कहा कि बहानों की नहीं, काम करने की जरूरत है। चुनाव आयोग पहले ही ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप खारिज कर चुका है। दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा द्वारा करारी हार के तीन दिन बाद आम आदमी पार्टी  प्रमुख ने शुक्रवार को ट्विटर पर ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने लिखा, ‘पिछले दो दिनों में, मैंने कई स्वयंसेवकों और मतदाताओं से बात की। वास्तविकता स्पष्ट है। हमने गलतियां कीं, लेकिन हम आत्मविश्लेषण करेंगे और सुधारात्मक कदम उठाएंगे। हमें फिर से ‘ड्राइंग-बोर्ड’ पर लौटने की जरूरत है’।

आम आदमी पार्टी (आप) ने लगातार तीन चुनाव में हार के बाद पार्टी के मिशन विस्तार में फौरी तौर पर बदलाव किया है। आप नेतृत्व ने दिल्ली नगर निगम चुनाव में उम्मीद के विपरीत मिले परिणाम की समीक्षा में पार्टी के मिशन विस्तार से केजरीवाल सरकार को दूर रखने और ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे को उठाने की रणनीति में बदलाव किया है। इससे पहले आप की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में पार्टी नेताओं ने विधानसभा और निगम चुनाव की रणनीति में दो प्रमुख गलतियों को उठाया। बैठक में शामिल पार्टी के एक नेता ने बताया कि इसमें केजरीवाल और उनके मंत्रियों का दिल्ली से बाहर दूसरे राज्यों में आप के ‘मिशन विस्तार’ में मशगूल होना और ईवीएम की गड़बड़ियों के मुद्दे को गलत तरीके से उठाना शामिल है। बैठक में चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद आप सांसद भगवंत मान, दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्र, विधायक अल्का लांबा और पार्टी नेता कुमार विश्वास द्वारा ‘पार्टी लाइन’ से हटकर बयान देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक चुनावी रणनीति पर सवाल उठाने वालों की दलील थी कि पिछले साल जब दिल्ली वाले डेंगू और चिकुनगुनिया से जूझ रहे थे तब केजरीवाल और उनके मंत्री विदेश दौरों या पंजाब, गोवा, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पार्टी के ‘मिशन विस्तार’ में लगे थे। विपक्ष द्वारा इसे मुद्दा बनाने पर जनता में नाराजगी बढ़ी, जिसकी झलक निगम चुनाव परिणाम में साफ दिखती है।

ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे को उठाने के तरीके पर भी पीएसी की बैठक में सवाल उठाए गए। हालांकि ईवीएम के विरोध के पैरोकारों की दलील थी कि यह मुद्दा उठाने से 21वीं सदी की युवा पार्टी द्वारा तकनीक को दुरूस्त करने के लिए उसे चुनौती देने का सकारात्मक संदेश जाएगा। लेकिन जनता में इसका संदेश बिल्कुल उल्टा गया और लोगों को लगा कि आप ईवीएम का विरोध कर नई तकनीक का विरोध करने वाली पुरातनपंथी सोच का साथ दे रही है और एक संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को बेवजह खतरे में डाल रही है। पार्टी नेतृत्व ने सभी पक्षों पर विचार के बाद ईवीएम के विरोध की रणनीति फिर से बनाने और केजरीवाल सरकार को ‘मिशन विस्तार’ से दूर रखते हुए सिर्फ दिल्ली पर ध्यान देने का फैसला किया है।

आत्ममंथन करेंगे

एक-एक करके आप के कई नेता हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़े जाने के खिलाफ आवाज उठाने लगे, तो केजरीवाल को पार्टी के वजूद पर खतरा दिखने लगा और उन्होंने अपनी भाषा बदल ली। ट्विटर पर उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में, मैंने कई स्वयंसेवकों और मतदाताओं से बात की। वास्तविकता स्पष्ट है। हमने गलतियां कीं, हम आत्मविश्लेषण करेंगे और सुधारात्मक कदम उठाएंगे। हमें फिर से ‘ड्राइंग-बोर्ड’ पर लौटने की जरूरत है। बहानों की नहीं, काम करने की जरूरत है।

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