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सदन में गूंजे केजरीवाल के असंसदीय बोल

सदन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल की गरिमा पर वार किया। उन्होंने उपराज्यपाल का नाम लिए बिना अतिथि शिक्षकों के बिल के बारे में उनकी तरफ इशारे में कहा ‘तू पास करता क्यों नहीं’।

Author नई दिल्ली | October 5, 2017 2:26 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का बिल तो सदन में पारित हो गया। लेकिन कार्यवाही से यह साफ हो गया कि आम आदमी पार्टी की सरकार फिर से कार्यपालिका और उपराज्यपाल से टकराव की मुद्रा में आ गई है। सदन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल की गरिमा पर वार किया। उन्होंने उपराज्यपाल का नाम लिए बिना अतिथि शिक्षकों के बिल के बारे में उनकी तरफ इशारे में कहा ‘तू पास करता क्यों नहीं’। केजरीवाल ने इस बिल की चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ब्यूरोक्रेसी से नहीं डेमोक्रेसी से चलेगी। केजरीवाल सदन में काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा – दिल्ली सरकार के अधिकारी उनकी नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि उनसे सरकारी फाइलें छिपाई जा रही हैं। अतिथि शिक्षकों से जुड़ी फाइल दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से छिपाई गई हैं। ये लोग (भाजपा) फेल हो गए, उसी वजह से उन्हें राजनीति में आना पड़ा।

उन्होंने सदन में मौजूद विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता से पूछा कि क्या वे चाहते है कि अतिथि शिक्षकों को नौकरी मिले? उन्होंने गुप्ता से कहा कि वे क्यों इस बिल के पास होने में रोड़े अटका रहे हैं। उन्होंने विजेंद्र गुप्ता को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे मर्द के बच्चे हैं तो अभी उनके कक्ष में चलें और इस बिल में जो भी संशोधन होने हैं, उसे ठीक करके, आज ही रात तक इसे पास करवाते हैं। केजरीवाल की इस के विरोध में विजेंद्र गुप्ता और भाजपा के अन्य तीनों सदस्य सदन से बाहर चले गए।  सदन में केजरीवाल का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एलजी साहब हैं। बड़े आदमी हैं। एलजी साहब कहते हैं कि यह सेवा से जुड़ा मामला है। जो उनकी सरकार के अधीन नहीं आता है, जबकि यह शिक्षा से जुड़ा मामला है, जो इनके अधीन आता है। उन्हें पत्र भेजकर कहा जा रहा है कि हमने अतिथि शिक्षकों के मामले में जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की।

सभी अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों में पूरी तरह से सभी औपचारिकताओं को पूरा किया गया है। पहले 150 कश्मीरी विस्थापित शिक्षकों की नियुक्ति सिर्फ कैबिनेट में पारित होने के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल ने उन्हें पक्का किया। केजरीवाल ने सवाल किया कि अब अतिथि शिक्षकों के मामले में क्या हो गया है? क्यों नए नियम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पहले कश्मीरी विस्थापितों की नियुक्त की गई, उसी तरह से अतिथि शिक्षकों के मामले में भी होना चाहिए था। केजरीवाल ने भाजपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि अतिथि शिक्षकों की नौकरी पक्की हो। केजरीवाल ने एक फिल्म का संवाद बोलते हुए कहा कि उनका नाम अरविंद केजरीवाल है और वे आतंकवादी नहीं हैं।  उन्होंने कहा कि क्यों उनसे सरकारी फाइलें छिपाई जा रही हैं? उनकी सरकार ने दिल्लीवासियों को आधे दाम पर बिजली दी, पानी मुफ्त दिया। वे दिल्लीवालों के हित में काम करना चाहते हैं, तो उनके कामों में अड़ंगे लगाए जाते हैं। उन्होंने उपराज्यापाल से कहा कि अगर वे फाइल नहीं दिखाएंगे तो समझा जाए कि उनकी नीयत साफ नहीं है और वे दिल्ली को बर्बाद करके छोड़ेंगे।

सदन में अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का बिल उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रखा। उन्होंने भी इस बिल के सदन में रोड़े अटकाए जाने को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा -उपराज्यपाल पत्र भेजकर कह रहे हैं कि यह सेवा से जुड़ा मामला है। यह पूरी तरह से शिक्षा से जुड़ा मामला है और शिक्षा दिल्ली सरकार के अधीन है। उन्होंने कहा कि उनकी चुनी हुई सरकार है, जो संविधान के तहत चुनी गई है। सदन में विपक्ष के सदस्य विजेंद्र गुप्ता और मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार अगर संवैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करके इस बिल को सदन में लाती तो आज यह पारित हो जाता और अतिथि शिक्षकों के घर में भी खुशियां होतीं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत ही नहीं है कि अतिथि शिक्षक नियमित हों।

 

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