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दिल्ली सरकार का मजदूरों को तोहफा- उपराज्यपाल की मंजूरी से बढ़ी न्यूनतम मजदूरी

दलाई लामा की प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा को लेकर चीन तिलमिला गया है और उसने भारत से एतराज जताया है। लेकिन चीनी आपत्ति को भारत सरकार ने नजरअंदाज कर दिया है।

Author नई दिल्ली | March 4, 2017 6:11 AM
दिल्ली उपराज्यपाल अनिल बैजल

दिल्ली सरकार ने राजधानी में न्यूनतम मजदूरी 13,350 रुपए प्रतिमाह करने का फैसला किया है। सरकार का दावा है कि यह देश में सबसे ज्यादा होगी। दिल्ली सरकार के इस पुराने फैसले को नए उपराज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। अब दिल्ली में अर्द्धकुशल श्रमिक को न्यूनतम 14,698 रुपए प्रतिमाह, कुशल श्रमिक को 16,182 रुपए प्रतिमाह, नॉन मैट्रीकुलेशन को 14,698 रुपए प्रतिमाह, मैट्रीकुलेशन को 16,182 रुपए प्रतिमाह और स्नातक को 17604 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। न्यूनतम मजदूरी की दरों में पिछली बार 23 साल पहले 1994 में बढ़ोतरी की गई थी। साल 1994 के बाद न्यूनतम मजदूरी में उपभोक्ता सूचकांक के आधार पर साल में दो बार सिर्फ महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की जाती रही है।

मजदूर यूनियन व अन्य सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की मांग करती रही हैं। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने 70वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला किया था। न्यूनतम मजूदरी अधिनियम 1948 की धारा 3 में यह प्रावधान किया गया है कि सरकार की ओर से हर 5 साल में न्यूनतम मजदूरी में संशोधन किया जाएगा। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की धारा 5 के तहत सरकार ने मजदूरी की दर को संशोधित करने के लिए 12 अप्रैल 2016 को एक सलाहकार समिति का गठन किया। अप्रैल 2016 से अगस्त 2016 के बीच कमेटी की 5 मीटिंग हुई और 22 अगस्त को कमेटी की सिफारिशों को उपराज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। 2 सितंबर 2016 को उपराज्यपाल ने यह प्रस्ताव लौटा दिया।


न्यूनतम मजदूरी की दर को संशोधित करने के लिए उपराज्यपाल ने एक त्रिपक्षीय कमेटी का गठन किया और कमेटी ने एक वैज्ञानिक आधार पर अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 1957 की ओर से तय मापदंडों और ब्रैट एंड कंपनी के केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर न्यूनतम मजदूरी संशोधित करने के लिए एक प्रक्रिया अपनाई। इसके लिए राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद की ओर से तय मापदंडों को आधार बनाया गया और भोजन में 2731 कैलोरी की आवश्यकता के आधार पर गणना की गई। सातवें वेतन आयोग ने भी 2700 कैलोरी को अपना आधार बनाया था।

कमेटी की दो टीमों कामगार यूनियनों व नियोक्ताओं के प्रतिनिधि ने स्वतंत्र रूप से मार्केट सर्वे किया और खाद्य पदार्थों व अन्य वस्तुओं के मूल्यों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी की गणना की। दोनों कमेटियों की ओर से न्यूनतम मजदूरी की संशोधित दरों में काफी अंतर था। इसलिए श्रम विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर खर्च को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी की दरों में वृद्धि निर्धारित की। दिल्ली सरकार न्यूनतम मजदूरी की बढ़ी हुई दरों के बारे में मजदूरों और नियोक्ताओं के लिए तीन माह का जागरूकता अभियान भी चलाएगी।

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