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एनआरसी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा, सभी दल साफ करें अपना रुख : शाह

असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) के मसले पर मंगलवार को संसद में जम कर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार को घेरा। दोपहर बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

Author नई दिल्ली, 31 जुलाई। | August 1, 2018 3:58 AM
असम की राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) के मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि हमारा पहले भी मत था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है और अब भी मानते हैं कि एनआरसी को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए।

असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) के मसले पर मंगलवार को संसद में जम कर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार को घेरा। दोपहर बाद राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में कांग्रेस का आरोप था कि सरकार के पास घुसपैठियों के आंकड़े नहीं। मकसद सिर्फ राजनीतिक लाभ का है। दिल्ली पहुंची तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने चेताया कि इस मुद्दे पर गृह युद्ध और रक्तपात छिड़ सकता है। उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर नए एनआरसी विधेयक की मांग की। जवाब में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संसद के बाहर और भीतर अपनी पार्टी की विचारधारा दोहराई कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर सभी दलों से अपना रुख साफ करने को कहा। इन सबके बीच, बांग्लादेश ने साफ कह दिया कि राष्ट्रीय नागरिक पंजिका भारत का अंदरूनी मामला है। उनका कोई नागरिक अवैध रूप से भारत में नहीं रह रहा है। अगर भारत के पास पुख्ता जानकारी है तो राजनयिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाए।

असम की राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) के मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि हमारा पहले भी मत था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है और अब भी मानते हैं कि एनआरसी को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। भाजपा के मन में बांग्लादेशी घुसपैठियों के विषय पर कोई दुविधा नहीं है इसलिए हम नागरिकता विधेयक लेकर आए। लोकसभा में यह पारित हो चुका है और राज्यसभा में लंबित है। बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने मांग की कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के विषय पर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस समेत सभी दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। देश की जनता संदिग्ध हालत में नहीं रह सकती।

किसी भी दूसरे देश से कोई यहां आए और रहने लगे, इस प्रकार से देश कैसे चलेगा। उन्होंने कहा कि एनआरसी का संबंध देश की सुरक्षा से है। राज्यसभा में उन्होंने एनआरसी को 1985 में कांग्रेस द्वारा घोषित योजना का परिणाम बताते हुए कहा कि इसे लागू करने की कांग्रेस में हिम्मत नहीं थी। इसलिए यह योजना अब तक लंबित रही। शाह ने एनआरसी को लागू करने पर देश में क्षेत्रीय एवं भाषाई आधार पर राज्यों के बीच टकराव शुरू होने की विपक्ष की आशंकाओं और आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि सदन में इस बात की भी चर्चा होनी चाहिए कि एनआरसी लाने की जरूरत क्यों पड़ी।

भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एनआरसी का संबंध देश की सुरक्षा और देशवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा से जुड़ा है। इस मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का विपक्ष पर आरोप लगाते हुए शाह ने कहा, ‘अलग अलग प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। प्रांत- प्रांत के बीच झगड़े जैसा माहौल खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं।’

कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी समय-समय पर अपना रुख बदलती रही है। उन्होंने दावा किया कि 1971 में इंदिरा गांधी ने कहा था कि देश में घुसपैठियों के लिए स्थान नहीं होगा। शाह ने राहुल गांधी से रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा कि क्या आप उनकी बात भूल गए या आज भी उस बात पर कायम हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बयान का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि वह कहती हैं कि गृह युद्ध हो सकता है। वह (ममता) स्पष्ट करें कि किस प्रकार का गृह युद्ध होगा।

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