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दिल्ली: अलकायदा का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

अदालत ने हक को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की हिरासत में भेज दिया। पिछले दो सालों में अल कायदा आतंकी के रूप में यह सबसे अहम गिरफ्तारी मानी जा रही है।

Author नई दिल्ली | Published on: September 19, 2017 2:41 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पूर्वी दिल्ली से ब्रिटेन के बांग्लादेशी मूल के 27 वर्षीय एक संदिग्ध अलकायदा आतंकवादी को गिरफ्तार किया गया है। वह रोहिंग्यों को म्यांमा की सेना से लड़ने का प्रशिक्षण देने और उन्हें कट्टरपंथ का घुट्टी पिलाने के लिए भारत आया था। पुलिस ने बताया कि इस ब्रिटिश नागरिक ने यह दावा कर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया कि उसका असली नाम शुमोन हक है। उसने बिहार के किशनगंज से जारी फर्जी मतदाता पहचान पत्र भी दिखाया लेकिन बाद में उसकी पहचान समीउन रहमान उर्फ राजू भाई के रूप में स्थापित हुई। 28 साल के शोमन हक को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने हक को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की हिरासत में भेज दिया। पिछले दो सालों में अल कायदा आतंकी के रूप में यह सबसे अहम गिरफ्तारी मानी जा रही है।

दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा जुलाई से रहमान के बारे में सूचनाएं जुटाने में जुटी थी। विशेष शाखा के जांच दल को पता चला था कि अल कायदा का राजू भाई नाम का एक शख्स आतंकवादी गतिविधियां चलाने के लिए दिल्ली में अपना अड्डा बनाने की कोशिश में लगा है। पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा) प्रमोद सिंह कुशवाह ने बताया कि बाद में यह पता चला कि राजू भाई दिल्ली में है और वह जिहाद के लिए लोगों की भर्ती करने की कोशिश कर रहा है। रविवार को पुलिस को पता चला कि राजू भाई संभावित जिहादी रंगरुटों में से एक से मिलने के लिए आइटीओ के पास विकासमार्ग पर शकरपुर आएगा।
कुशवाह ने बताया कि उसे पकड़ा गया और बाद में पुलिस को उसका असली नाम पता चला। उसके पास से 9 एम एम की एक पिस्तौल, लैपटॉप, मोबाइल फोन, 2000 डालर, 13000 रुपए मूल्य का बांग्लादेशी टका और भारतीय रुपए बरामद किए गए। रहमान प्रशिक्षित आतंकवादी है और वह आतंकवादी गतिविधियों के लिए भारत के अलावा मोरक्को, इस्लामिक रिपब्लिक आॅफ मॉरिटानिया, तुर्की, सीरिया और बांग्लादेश का चक्कर लगा चुका है।

वह सीरिया में अलकायदा से जुड़े संगठन जबाथ अल नुसरा में शामिल हुआ और सीरियाई सेना के खिलाफ कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया। वह 2013 में अलकायदा की विचारधारा की गिरफ्त में आया और उससे जुड़ गया। उसने सीरिया में उसके कैंप में तीन हफ्ते की ट्रेनिंग ली और वहां 2014 तक लड़ा।
सीरिया में रहने के दौरान रहमान व उसके साथी आतंकियों को म्यांमा में रोहिंग्या मुसलमानों पर कथित अत्याचार के बारे में पता चला। चूंकि उसकी पृष्ठभूमि बांग्लादेश की थी, इसलिए उसे वहां एक जिहादी ग्रुप खड़ा करने के लिए चुना गया। वह युवाओं की अलकायदा में भर्ती के लिए 2014 में बांग्लादेश आया। उसे बांग्लादेश के नागरिक यासीन ने मदद पहुंचाई। रहमान ढाका आया और उसने चटगांव में ठिकाना बनाया जहां उसने कुछ युवाओं को म्यांमा में जिहाद के लिए प्रेरित किया। बांग्लादेश में उसे आतंकवादी गतिविधियों को लेकर गिरफ्तार किया गया और तीन साल जेल में रहने के बाद इसी साल अप्रैल में वह रिहा हुआ। बाद में वह नुसरा फ्रंट के प्रमुख मुहम्मद अल जावलानी के निर्देश पर अप्रैल में भारत आया। उसका लक्ष्य रोहिंग्या मुसलमानों के खातिर लड़ाई करने, धन जुटाने और युवकों को भड़काने के लिए मिजोरम और मणिपुर में अपना अड्डा बनाना था।

 

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