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जल्द गायब होंगे शर्तिया इलाज के दावे करने वाले विज्ञापन

देश के तमाम रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों की दीवारों व अन्य सार्वजनिक जगहों पर लिखे ऐसे विज्ञापन दिखना आम है, जिनमें मर्दाना ताकत बढ़ाएं, गंजे सिर पर बाल उगाएं, दो महीने में लंबाई बढ़ाएं, दस दिन में वजन बढ़ाएं या घटाएं जैसे दावे किए जाते हैं।

Author नई दिल्ली, 5 अगस्त। | August 6, 2018 5:43 AM
प्रतीकात्मक चित्र

आपने कभी न कभी किसी दीवार पर या किसी पर्चे पर सफेद दाग, गुप्त रोग, गंजापन व बांझपन जैसे रोगों के शर्तिया इलाज के दावे करते विज्ञापन जरूर देखे होंगे। जड़ी-बूटियों व आयुर्वेदिक औषधियों से बीमारियों के जादुई इलाज के दावे करने वाले ऐसे विज्ञापनों के जरिए लोगों को गुमराह करने वाले ढोंगियों पर जल्द ही लगाम लगने वाली है। इस बाबत केंद्र सरकार एक कानून लाने वाली है, जिसके बाद इस तरह के दावे करने वाले विज्ञापन छापना व छपवाना गैरकानूनी हो जाएगा। ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल्स में संशोधन करके बनाए जाने वाले इस कानून का मसौदा तैयार कर लिया गया है।

देश के तमाम रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों की दीवारों व अन्य सार्वजनिक जगहों पर लिखे ऐसे विज्ञापन दिखना आम है, जिनमें मर्दाना ताकत बढ़ाएं, गंजे सिर पर बाल उगाएं, दो महीने में लंबाई बढ़ाएं, दस दिन में वजन बढ़ाएं या घटाएं जैसे दावे किए जाते हैं। बहुत से लोग ऐसे विज्ञापनों के मकड़जाल में फंसकर फायदे के बजाए अपना नुकसान कर बैठते हैं। इसीलिए आयुष मंत्रालय ने इस तरह के भ्रामक आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं वाले विज्ञापनों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। इसके लिए ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल्स में बदलाव का मसौदा तैयार कर लिया गया है। अब बस कानून मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिलने का इंतजार है।

मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, सरकार ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल्स में बदलाव करने वाली है। बदलाव का मसौदा कानून मंत्रालय के पास भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचना जारी कर नियम लागू कर दिए जाएंगे। कानून बनने के बाद आयुष दवा (यूनानी होम्योपैथी, आयुर्वेदिक) से चमत्कारिक इलाज का दावा नहीं किया जा सकेगा। रेडियो टीवी पर दिए जाने वाले विज्ञापनों के लिए भी स्टेट ड्रग कंट्रोलर से मंजूरी लेनी होगी। मंजूरी के बिना या उसके उलट विज्ञापन दिखाने पर सीधे कार्रवाई हो सकेगी और ऐसे दावे करने वाले उत्पादों का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकेगा।

इस बारे में अधिकृत आयुर्वेदाचार्यों का भी यही कहना है कि ऐसे विज्ञापन भ्रामक व लोगों को जोखिम में डालने वाले होते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक भी मानते हैं कि इस तरह के दावे कारगर नहीं हैं क्योंकि कोई कहीं भी तंबू डाल कर डेरा जमा लेता है और इलाज के नाम पर लोगों को फंसा लेता है। आयुष मंत्रालय ने एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया से ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर नजर रखने और उन्हें चेतवनी देने को कहा है। हालांकि देश में ऐसे भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट पहले से है, लेकिन यह केवल एलोपैथिक दवाओं पर ही लागू है। इसके तहत एलोपैथिक दवा कंपनियां मामूली बुखार ठीक करने का दावा भी नहीं कर सकतीं। लेकिन यह कानून भारतीय चिकित्सा पद्धतियों या आयुष के तहत आने वाली दवाओं के क्षेत्र में लागू नहीं था। ऐसा इसलिए क्योंकि इन दवाओं की व्याख्या को लेकर विवाद बना रहा है और अब सरकार आयुष मंत्रालय के अधीन आने वाली दवाओं या इस श्रेणी की दवाओं के खिलाफ अलग कानून लाने वाली है। इस पर अमल के लिए एक निगरानी तंत्र भी होगा।

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