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JNU: लाल लंबी सीढ़ियां अब नहीं बनेंगी ऐतिहासिक जमावड़े की गवाह

पहले जो जगह विरोध-प्रदर्शनों के लिए महत्त्वपूर्ण हुआ करती थी, वहां लोहे की सलाखें लगा दी गई हैं। संवाद-स्थल के रूप में बनीं लाल रंगों वाली ‘लंबी सीढ़ियों’ पर गमले रख दिए गए हैं।

Author नई दिल्ली | December 14, 2016 4:25 AM
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय

अपने प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन न करने की तमाम चेतावनियों को बेअसर होता देख जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ‘कार्यवाही’ से ‘कार्रवाई’ की भूमिका में आ गया है। इस कड़ी में सबसे पहले प्रशासनिक भवन के पास मौजूद ‘फ्रीडम स्क्वायर’ का स्वरूप ही बदल दिया गया है। पहले जो जगह यहां विरोध-प्रदर्शनों के लिए महत्त्वपूर्ण हुआ करती थी, वहां लोहे की सलाखें लगा दी गई हैं। इतना ही नहीं जेएनयू में संवाद-स्थल के रूप में बनीं लाल रंगों वाली ‘लंबी सीढ़ियों’ पर गमले रख दिए गए हैं।  छात्र इसे जमावड़े को रोकने की सरकारी कोशिश बता रहे हैं। हालांकि विश्वविद्यालय की दलील है कि जगह की कमी को दूर करने के लिए छोटी सी जगह के उपयोग के लिए सोचा गया है। सनद रहे कि प्रशासनिक भवन के अगले भाग में ही जेएनयू के छात्र कई-कई दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठते रहे हैं। अनशन और फिर विरोध प्रदर्शनों को अनजाम देते रहे हैं। मंगलवार को ‘फ्रीडम स्क्वायर’ नाम की जगह का नजारा बदला दिखा। लोहे की सलाखों के पीछे दीवारों पर चस्पे नारे, तस्वीरें और पोस्टर कैदखानों के भीतर नजर आने लगे हैं। उधर ,छात्र संगठन फ्रीडम स्क्वायर के इस तरह घेरे जाने से से नाखुश हैं। वे इसे छात्रों की आवाज दबाने कोशिश बता रहे हैं। छात्र नेता व आइसा प्रदेश अध्यक्ष नीरज कुमार का कहना है कि कुलपति हमारे सवालों से घबराते हैं। नजीब के मुद्दे पर प्रश्न पूछने पर पिछले दरवाजे से निकल जाते हैं। उन्होंने कहा, प्रशासन स्थान घेर सकता है लेकिन विचार नहीं। लड़ाई आगे तल लड़ी जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को देर शाम कैंपस और फिर बुधवार को संसद मार्ग पर मार्च का फैसला किया गया है। जेएनयू में मंगलवार को दिन भर बनाए गए पोस्टरों, स्लोगन यह तस्वीर साफ करते हैं कि लापाता ‘नजीब’ का मुद्दा भी इस मार्च के केंद्र में होगा। पूर्व छात्रसंघ सचिव रामा नागा ने कह, प्रशासन के पास समझदारी की दिक्कत है। वे समझते हैं कि ऐसा करके वे हमारे हौसले तोड़ देंगे या हमसे विरोध करने का अधिकार छीन लेंगे तो ऐसा नहीं है। इसका भी विरोध होगा। आइसा महासचिव रामा ने कहा कुलपति आरएसएस के प्रतिनिधियों, एबीवीपी सदस्यों से मिलते हैं, लेकिन छात्र संघ से नहीं मिलते। उन्होंने कहा, हमारे विश्वविद्यालय में संघी प्रशासन की यह स्थिति है। एबीवीपी के छात्र नेता और पूर्व जेएनयूएसयू सह सचिव सौरभ शर्मा का कहना है, जेएनयू के प्रशासनिक ब्लॉक में धरना-प्रदर्शन पर लगी रोक पर छात्रसंघ और जेएनयू प्रशासन एक बार फिर आमने सामने है।

छात्रसंघ इसे मुद्दा बना एक बार फिर अड़ गया है। इससे पहले जेएनयू प्रशासन ने जेएनयू छात्र संगठन को नोटिस देकर गतिविधियों को प्रशासनिक भवन से दूर रखने की हिदायत दी थी। साथ ही कहा था नियम तोड़ने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बाइस घंटे अपने दफतर में सहयोगियो के साथ बंधक बनाए गए कुलपति अब इस मामले में फूंक- फूंक कर कदम रख रहे हैं। दरअसल इस प्रकरण के बाद जेएनयू प्रशासन ने जेएनयू छात्रसंघ को निर्देश पत्र जारी कर प्रशासनिक ब्लॉक में किसी भी विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने कहा था कि प्रशासनिक ब्लॉक के पास ये गतिविधियां ना करें, अन्यथा विवि नियमों के मुताबिक आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर होने वाले प्रर्दशनों के चलते जेएनयू के अंदर काम करने वाले और जेएनयू के आसपास के लोगों ने प्रशासन से शिकायत की है कि इससे वह परेशान होते हैं। शोर होता और रोजमर्रा के कार्य प्रभावित होते हैं। लिहाजा छात्रसंघ को कहा गया है कि अब वह प्रशासनिक ब्लॉक में कोई धरना-प्रदर्शन नहीं करेंगे। छात्र संघ इसका अनिश्चितकालीन विरोध जारी रखने का ऐलान करते हुए मंगलवार को कहा कि वे पीछे नहीं हटेंगे।हालांकि जेएनयू ने कहा है कि छात्रसंघ चाहे तो ओपन थियेटर, छात्र गतिविधि केंद्र आदि स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन छात्र इससे सहमत नहीं हैं। इसको लेकर छात्रसंघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय ने कहा-जेएनयू के प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर प्रदर्शन करने की परंपरा रही है।

 

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