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यौन उत्पीड़न के आरोपी कर्मचारी का किया जा सकता है तबादला

यौन उत्पीड़न की जांच के लिए गठित सभी शिकायत समितियों की अध्यक्षता किसी महिला को मिलनी चाहिए और कम से कम उसके सदस्यों की आधी संख्या महिलाओं की होनी चाहिए।

Author नई दिल्ली | September 13, 2016 1:51 AM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

यौन उत्पीड़न के मामलों में आरोपित कर्मचारियों का तबादला दूसरे कार्यालय में किया जा सकता है ताकि उन्हें पीड़ित को प्रभावित करने से रोका जा सके और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने यह भी कहा है कि यौन उत्पीड़न के आरोपित वरिष्ठ अधिकारियों की जांच कनिष्ठ अधिकारी कर सकते हैं। यह कदम इन शिकायतों के बाद उठाया गया है कि कुछ मामलों में आरोपित कर्मचारी पीड़िताओं को प्रभावित करने या धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से केंद्र सरकार के सभी विभागों को जारी एक आदेश में कहा गया है कि उचित जांच सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय या विभाग संदिग्ध अधिकारी या आरोपित अधिकारी का तबादला किसी दूसरे कार्यालय में कर सकते हैं ताकि यह खतरा खत्म हो सके कि अधिकारी अपने पद के प्राधिकार का उपयोग शिकायत समिति की कार्यवाही प्रभावित करने में कर सकता है।

आदेश में कहा गया है कि यौन उत्पीड़न की जांच के लिए गठित सभी शिकायत समितियों की अध्यक्षता किसी महिला को मिलनी चाहिए और कम से कम उसके सदस्यों की आधी संख्या महिलाओं की होनी चाहिए। अगर किसी खास कार्यालय में पर्याप्त वरिष्ठता की कोई महिला अधिकारी उपलब्ध नहीं है, तो मौजूदा नियम-कायदों के तहत किसी दूसरे कार्यालय से किसी महिला अधिकारी को नियुक्त करना चाहिए। आदेश में कहा गया है कि किसी अनुचित दबाव की संभावनाओं को दूर करने के लिए बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
शिकायत समिति को किसी तीसरे पक्ष को शामिल करना चाहिए।

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यह कोई गैर सरकारी संगठन या कोई अन्य निकाय हो सकता है, जो यौन उत्पीड़न के मुद्दे से वाकिफ हो। डीओपीटी ने कहा, ‘यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना करने वाले अधिकारी के खिलाफ जांच करने वाली समिति की वैधता के मुद्दे पर भी गौर किया गया, जहां अध्यक्ष आरोपी अधिकारी से कनिष्ठ हो। यह स्पष्ट है कि न तो केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों में और न ही कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीड़न (नियंत्रण, निषेध एवं समाधान) कानून 2013 में ऐसी कोई रोक है कि शिकायत समिति का अध्यक्ष आरोपी अधिकारी से कनिष्ठ नहीं होना चाहिए।’ डीओपीटी ने यह भी कहा कि इससे किसी भी तरह आरोपी अधिकारी के साथ पूर्वग्रह नहीं होता।

यौन उत्पीड़न में शारीरिक संपर्क, छेड़छाड़, यौन संबंधों की मांग या आग्रह, अश्लील टिप्पणियां, अश्लील सामग्री दिखाना और यौन प्रकृति का कोई अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक, गैर मौखिक आचरण शामिल है। इसके अलावा रोजगार में तरजीह देने का कोई वायदा या किसी तरह की हानि पहुंचाने वाला आचरण, महिला के वर्तमान और भविष्य के स्तर के बारे में किसी तरह की धमकी, उसके कार्य में हस्तक्षेप, भयभीत करना, उसके लिए आक्रामक, प्रतिकूल माहौल उत्पन्न करना, उसके स्वास्थ्य या सुरक्षा को प्रभावित करने के मकसद से अपमानजनक आचरण भी यौन उत्पीड़न माना जा सकता है।

 

 

 

 

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