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आजादपुर के व्यापारियों ने शुरू की बेमियादी हड़ताल, सरकार का दखल खत्म करने की मांग

व्यापारियों की मांग है कि मंडी की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए और यहां के कामकाज में सरकार के नुमाइंदों की दखलंदाजी खत्म हो।
Author नई दिल्ली | August 1, 2017 05:22 am
दिल्ली में सब्जी बेचता एक विक्रेता। (फाइल फोटो)

एशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी आजादपुर के व्यापारी सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए। व्यापारियों की मांग है कि मंडी की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए और यहां के कामकाज में सरकार के नुमाइंदों की दखलंदाजी खत्म हो। विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने हड़तालियों को संबोधित करते हुए इस स्थिति के लिए सीधे सरकार को दोषी ठहराया। गुप्ता मंगलवार को उपराज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे। दिल्ली कृषि विपणन परिषद के सदस्य मेठा राम कृपलानी ने कहा कि एशिया की सबसे बड़ी मंडी में सोमवार को अंगूर, अनार, सेब, मौसमी, आम, सरदा, तरबूज, अनानास, शाक-सब्जी व मटर की आवक बिल्कुल बंद रही और हड़ताल सफल रही। हालांकि आप सरकार के कुछ समर्थक व्यापारियों ने दुकानें खुली रखीं, लेकिन ग्राहक नदारद रहे। हड़ताल पर गए व्यापारियों ने दिल्ली की जनता से महंगाई और असुविधा के लिए माफी मांगी है और दिल्ली सरकार को इसका जिम्मेदार बताया है। संयोजक अनिल मल्होत्रा ने बताया सरकार ने हमें हड़ताल पर जाने को मजबूर किया है। एपीएमसी (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी) प्रशासन आबंटन के नाम पर नवनिर्मित थड़ों पर अपने चहेतों को बिठाना चाहता है। नए बने शेड खाली पड़े हैं, लेकिन जिन लोगों से फंड लेकर उनका निर्माण करवाया गया था, आज उन्हें ही वहां से बेदखल कर दिया गया है।

कृपलानी ने कहा कि व्यापारी आॅनलाइन बैंकिंग का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन सरकार चेक से भुगतान को न मानकर वित्तीय व्यवस्थाओं का अपमान कर रही है। आजादपुर मंडी के मझोले व्यापारी चेक अस्वीकार होने से खासा परेशान और नाराज हैं। उन्होंने कहा कि मंडी की हड़ताल का लगभग 30 एसोसिएशंस के प्रतिनिधि समर्थन कर रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा समर्थन आजादपुर में कार्यरत मजदूर संगठनों का है, जिसके कारण मंडी की आपूर्ति व्यवस्था बिल्कुल ठप है। एक अनुमान के मुताबिक, आजादपुर मंडी का रोजाना का टर्नओवर 30 से 35 करोड़ रुपए का है, जिससे 1 फीसद के हिसाब से 30 लाख रुपए का राजस्व एपीएमसी में जमा होता है। एपीएमसी को यहां के लाइसेंसी व्यापारियों से लगभग 100 करोड़ रुपएवार्षिक मार्केट फीस मिलती है, जिसके एवज में एपीएमसी प्रशासन की आढ़तियों को माल बेचने की सुविधा मुहैया करवाने की जिम्मेदारी है। व्यापारियों का मानना है कि अगर हड़ताल लंबी खिंची तो दिल्ली में सब्जियों के दाम आसमान छू सकते हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में होने वाली सब्जी की कमी और दामों में होने वाली वृद्धि के लिए दिल्ली सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि मंडी में अवैध कब्जों, भ्रष्टाचार और गंदगी पर सरकार आंखें मूंदे बैठी है।

 

 

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