पहले से संकट में घिरी आप सरकार पर डेंगू की मार - Jansatta
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पहले से संकट में घिरी आप सरकार पर डेंगू की मार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में भारी पराजय के बाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं की बिहार चुनाव में सक्रिय..

Author नई दिल्ली | September 19, 2015 11:06 AM
कई मौकों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री और राज्यपाल नजीब जंग के बीच सीधी तकरार देखी गई है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में भारी पराजय के बाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं की बिहार चुनाव में सक्रिय भागीदारी करने की योजना को भारी झटका लगा है। रही-सही कसर डेंगू की मार ने धो डाली। केंद्र सरकार, उपराज्यपाल नजीब जंग समेत दिल्ली पुलिस से सीधा टकराव लेने का खामियाजा भी दिल्ली सरकार भुगतती दिख रही है। तमाम विकास कार्य रुके पड़े हैं। लोगों का दबाव बढ़ने से आप नेताओं की भाषा भी बदली हुई लग रही है। अब सीधे प्रधानमंत्री का नाम लेकर हमले कम किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री समेत आप सरकार के मंत्री केंद्र सरकार के अनेक मंत्रियों से मिलकर संवाद बनाए रखने में लगे हुए हैं। जिस केंद्र सरकार पर काम में बाधा डालने का आरोप लगाया जा रहा था, डेंगू पर उसी केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री बेहतर चौकसी का प्रमाणपत्र लेने का दावा करते हैं। अभी भी उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस से सार्वजनिक रूप से संवाद कम और टकराव ज्यादा हो रहा है।

सीएनजी फिटनेस घोटाले पर दिल्ली सरकार हार मानने को तैयार नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जांच आयोग बनाने के फैसले को नहीं माना लेकिन सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही। सरकार के न चाहते हुए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के उप राज्यपाल के बनाए प्रमुख मुकेश मीणा ने अपने आप इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी तो दिल्ली सरकार ने रिटायर जज एसएन अग्रवाल की अगुवाई में आयोग ने उनको जवाब तलब किया।

मामला अदालत में पहुंचने से सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। उसी तरह से दानिक्स अधिकारियों को नया वेतनमान देने आदि के फैसले को भी केंद्र सरकार ने नहीं स्वीकारा लेकिन दिल्ली सरकार अपने फैसले पर अड़ी हुई है। इसके अलावा कृषि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाने के फैसले को उप राज्यपाल ने रोक दिया और पिछले महीने स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाने की फाइल दोबारा मंगवाई। इस तरह के कई और मुद्दे अधिकारियों के तबादलों और नियुक्तियों के अलावा पिछले छह महीने से लगातार सामने आ रहे हैं। यह तब हो रहा है जब दिल्ली में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के माध्यम से उप राज्यपाल के अधिकार का मामला सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तक में विचाराधीन है।

खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आरोप लगाते रहते हैं कि केंद्र सरकार और उप राज्यपाल उन्हें काम करने नहीं दे रहे हैं। वे उन फैसलों को गिनाते हैं जिनको उपराज्यपाल ने रोक रखा है। आप के कई विधायक जेल गए और करीब तीन दर्जन के खिलाफ दिल्ली पुलिस कार्रवाई करने वाली है। पिछले दिनों जब केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिले तो कहा गया कि उन्होंने आप विधायकों के खिलाफ बेवजह दर्ज किए गए मामले हटाने की मांग की। सिंह की तारीफ को राजनीतिक गलियारों में इसी से जोड़ा गया। उसी दौरान केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी केजरीवाल से सचिवालय में आकर मिली।

केंद्रीय मंत्रियों से सौहार्दपूर्ण ढंग से मिलने का सिलसिला अब भी जारी है। अपनी पार्टी के अनेक नेताओं को पार्टी से निकालने और विपक्षी दलों के जोरदार अभियान के बावजूद आप और केजरीवाल को यह लगता था कि उनकी लोकप्रियता कम नहीं हो रही है। उसी उत्साह में उन्होंने बिहार के चुनाव में वहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी। लेकिन जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि नीतीश के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के राजद को और कांग्रेस को भी समर्थन देना पड़ेगा या समर्थन देना मान लिया जाएगा जिनका विरोध करके ही उन्होंने राजनीति की शुरुवात की, इतना ही नहीं बिहार में इस गठबंधन का समर्थन करने से दिल्ली में रहने वाला बिहार मूल का वोटर नाराज होगा और जनाधार कम होगा-केजरीवाल ने आगे बोलना बंद कर दिया।

इसी बीच आप ने धूम-धड़ाके से अपना छात्र संगठन बनाकर डूसू चुनाव लड़ना तय किया। विधानसभा चुनाव से ज्यादा हर तरह से तैयारी करके उन्होंने छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) को चुनाव लड़वाया लेकिन वह न केवल चुनाव हारी बल्कि कांग्रेस की छात्र शाखा एनएसयूआइ से भी पीछे रह गई। इस सदमें के बाद सरकार की भारी फजीहत डेंगू के मामले में हुई। कई सालों से अमूमन हर साल इस मौसम में डेंगू का प्रकोप होने के बावजूद दिल्ली सरकार उसके लिए कोई तैयारी नहीं की। बेकाबू हालात में दिल्ली सरकार के अस्पतालों की हालत सबसे ज्यादा खराब दिखी। पूरी दिल्ली में अराजकता का माहौल बनने के बाद सरकार सक्रिय हुई लेकिन अभी भी हालात बेकाबू हैं। जो हालात हैं उसमें लोग डेंगू के मच्छर खत्म होने के लिए जाड़े का ही इंतजार कर रहे हैं। जो डेंगू से पीड़ित हैं वे किसी तरह से ठीक होने की कोशिश कर रहे हैं। अब तो सीधे अदालत ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इसमें भाजपा शासित नगर निगमों की फजीहत तो हो ही रही है दिल्ली सरकार की भारी लापरवाही उजागर हुई है।

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