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आम आदमी पार्टी में कुमार विश्वास का विरोध हुआ तेज, पोस्टर विवाद के जल्द थमने की उम्मीद नहीं

आम आदमी पार्टी एक बार फिर से ‘विश्वास’, ‘अविश्वास’ की खेमेबाजी में बुरी तरह से फंसती नजर आ रही है।

Author नई दिल्ली | July 13, 2017 12:47 PM
आप नेता कुमार विश्वास (फोटो-पीटीआई)

आम आदमी पार्टी एक बार फिर से ‘विश्वास’, ‘अविश्वास’ की खेमेबाजी में बुरी तरह से फंसती नजर आ रही है। रविवार को राजस्थान में संगठन निर्माण को लेकर कार्यकर्ताओं और संभावित पर्यवेक्षकों के साथ प्रदेश प्रभारी कुमार विश्वास की बैठक में पोस्टर विवाद का अप्रत्यक्ष जिक्र सामने आया।  हालांकि, पार्टी कार्यालय परिसर की बाहरी दीवारों पर चिपकाए गए पोस्टर हटाए जा चुके थे, लेकिन पार्टी को मूल सिद्धांतों पर वापस लौटने की बात करते हुए कुमार ने कार्यकर्ताओं को हिदायत दी कि कई ‘आत्ममुग्ध बौने’ इस मॉडल का विरोध करेंगे, साजिश करेंगे लेकिन घबराना नहीं है। कुमार 25 जून को जयपुर में प्रदेश प्रभारी के तौर पर कार्यकर्ताओं की पहली बैठक करेंगे। रविवार की बैठक कुमार विश्वास ने कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठ कर की और कहा कि वे कभी ‘सिहांसन’ पर बैठने के ख्वाहिशमंद नहीं रहे हैं।  शनिवार के किसान सम्मेलन के दौरान पोस्टर विवाद की तुलना रामायण के पात्रों से कर चुके कुमार रविवार को भी इशारा कर पार्टी में प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधने से नहीं चूके। कुमार ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम सभी से शालीनता से मिलते थे, उनका निष्कासन महलवालों ने किया, लेकिन उसी राम ने रावण जैसी शक्तियां खत्म कीं। उन्होंने कहा, ‘आज के भाषण की रिकॉर्डिंग सुनने के बाद कुछ आत्ममुग्ध बौने फिर चिल्लाएंगे, तो समझ जाना। पोस्टर छोटी चीज है, चरित्र हनन करेंगे, फिर भी नहीं घबराना’।

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पोस्टर विवाद पर कुमार ने शनिवार को कहा था कि जब कोई अच्छा यज्ञ होता है तो खर, दूषण और ताड़का जैसे लोग जरूर आते हैं। पांच लोगों की राजमहलीय और दरबारी राजनीति और षड्यंत्र के लिए हम नहीं बने हैं। हम वही हैं जो जंतर-मंतर में बने थे। सत्ता में आने से मूल चरित्र नहीं बदलना चाहिए।रविवार की बैठक में कुमार विश्वास ने एक बार फिर से स्पष्ट किया कि राजस्थान का चुनाव पार्टी अपने मूल सिद्धांतों पर लड़ेगी जैसा कि पहला चुनाव लड़ा गया था। संगठन निर्माण और टिकट वितरण में कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी और टिकट का हकदार वही होगा जिसे पार्टी में एक साल का अनुभव होगा। टिकट वितरण में सिफारिश नहीं चलेगी। अगले साल होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का संगठन तैयार करने में जुटे कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी से चुनाव लड़ने का आश्वासन मिलने के बाद ही वे संगठन की तैयारी में लगे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को एक बार फिर ‘केजरीवाल की मोदी-मोदी’ जैसी नकारात्मक राजनीति से दूर मुद्दों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा।

कुमार विश्वास ने पर्यवेक्षक के तौर पर राजस्थान जाने वाले लोगों को कहा कि होटलों में न ठहरें, बल्कि किसी पार्टी कार्यकर्ता के घर ठहरें। उन्होंने कहा कि पिरामिड संरचना पर संगठन तैयार किया जाएगा और विधानसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की सूची जल्द तैयार की जाएगी। कुमार ने 6 महीने में संगठन तैयार करने, अगले 6 महीने में लोगों से संवाद और उसके अगले छह महीने चुनाव प्रचार का लक्ष्य रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में लगातार बदलते प्रभारी की वजह से ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है जो अब नहीं होगी। लगभग 300 कार्यकर्ताओं की भीड़ को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि सभी की सहमति और असहमति को स्थान दिया जाएगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों को राजस्थान के शोषण के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कुमार ने कहा कि राजस्थान को ‘रावणी शासन’ से मुक्त कराने के लिए बहुत मेहनत करने की जरूरत है। लेकिन अहम सवाल यह है कि राजस्थान प्रभारी के तौर पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे कुमार विश्वास के पास पार्टी के अंदर उठती आवाजों के खिलाफ भी कोई रणनीति है?

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