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दिल्ली: आप के लिए घाटे का सौदा बन सकते हैं लाभ के पद

आप के कुल 67 विधायकों में से 40 के मामले में ‘लाभ के पद’ संबंधी दो अलग-अलग शिकायतें चुनाव आयोग के पास विचाराधीन हैं।

Author September 20, 2016 4:32 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

भारी बहुमत से दिल्ली की सत्ता हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) के आधे से ज्यादा विधायकों की सदस्यता अधर में लटकी हुई है। आप के कुल 67 विधायकों में से 40 के मामले में ‘लाभ के पद’ संबंधी दो अलग-अलग शिकायतें चुनाव आयोग के पास विचाराधीन हैं।  इसमें से पहली शिकायत 21 संसदीय सचिव नियुक्त किए गए विधायकों की है जिसकी सुनवाई 23 सितंबर को है और दूसरी शिकायत 27 विधायकों की है जिन्हें केजरीवाल सरकार ने रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इस शिकायत को आयोग ने एक हफ्ते पहले ही राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजा है। इनमें से 8 विधायक दोनों मामलों में शामिल हैं। ये दोनों ही शिकायतें युवा वकीलों की ओर से की गई हैं।

21 संसदीय सचिवों के मामले में युवा वकील प्रशांत पटेल की ओर से दायर याचिका पर चुनाव आयोग पिछले दो महीने में कई बार सुनवाई कर चुका है और इसकी अगली सुनवाई 23 सितंबर को है, जोकि याचिकाकर्ता के अनुसार आखिरी सुनवाई होगी। इसके आधार पर आयोग राष्ट्रपति को अपना मत भेजेगा। हालांकि इन 21 विधायकों की विधानसभा सदस्यता पर कोई फैसला आता, इससे पहले ही वकालत के एक युवा छात्र विभोर आनंद ने 21 जून, 2015 को 27 आप विधायकों के बारे में शिकायत की कि दिल्ली सरकार ने उन्हें राजधानी के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जोकि लाभ के पद के दायरे में आता है। इस शिकायत को आयोग ने 12 सितंबर को जीएनसीटीडी एक्ट 1991 के सेक्शन 15(3) व (4) के तहत विचार के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा है। इन 27 विधायकों में आठ ऐसे हैं जो संसदीय सचिव मामले में भी शामिल हैं।

कुछ ही दिन पहले कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विभोर आनंद ने कहा, ‘मेरी शिकायत के पीछे मुख्य मंशा यह है कि आप विधायकों का पाखंड उजागर हो। वे सत्ता के लालची हैं और उन्हें जनकल्याण से कोई लेना-देना नहीं है। मैं पहले भी आप की पाकिस्तान से फंडिंग के मामले को उजागर कर चुका हूं।’ वहीं आप विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने पूरे मामले को भाजपा प्रायोजित बताया है। गौतम का भी नाम इस याचिका में शामिल है। उन्होंने कहा, ‘रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में मेरा पद लाभ के दायरे में नहीं आ सकता क्योंकि मुझे कोई सुविधा और भत्ता नहीं दिया जा रहा है।’

विभोर आनंद ने कहा कि वे पिछले पांच साल से आप और अन्य राजनीतिक दलों के भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि विभोर ने वॉलंटियर के रूप में कुछ समय के लिए आप ज्वाइन की थी। इस बात पर उन्होंने कहा कि वॉलंटियर के रूप में उनकी सदस्यता 2015 में ही खत्म हो चुकी है और वह इस मंशा के साथ आप से जुड़े थे कि पार्टी के अंदरूनी भ्रष्टाचार को लोगों के सामने लाएं। वहीं इन दोनों याचिकाओं के कारण आप के आधे से ज्यादा विधायकों की सदस्यता खतरे में है। अगर आयोग इस नतीजे पर पहुंचता है कि ये विधायक लाभ के पद के दायरे में आते हैं तो दिल्ली विधानसभा में आप के केवल 37 विधायक ही बचे रह जाएंगे।

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