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पंजाबी वोटरों को लुभाने की एक और कोशिश? AAP सरकार ने फ्लाईओवर को दिया सिख योद्धा का नाम

बाबा बंदा सिंह बहादुर का हिंदु और सिख, दोनों समुदायों पर असर माना जाता है।

बाबा बंदा सिंह बहादुरआम आदमी पार्टी को उम्‍मीद है कि वे पंजाब में अपनी लोकसभा चुनाव में मिली जीत को ही दोहराएंगे।

दिल्‍ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने राजधानी के प्रमुख अखबारों में विज्ञापन देकर ऐलान किया है कि वे बारापुला फ्लाईओवर का नाम बाबा बंदा सिंह बहादुर के नाम पर करने जा रहे हैं। बाबा एक सिख आईकन हैं, जिनका सिख और हिंदुओं दोनों समुदाय पर प्रभाव माना जाता है। दिल्‍ली सरकार ने उनके शहादत दिवस के 300वें साल पर यह कदम उठाने का फैसला किया है। बाबा सिंह बहादुर शुरू में हिंदू थे, लेकिन दसवें सिख गुरु गोबिंद सिंह के संपर्क में आने के बाद उन्‍होंने सिख धर्म अपना लिया। गुरु गोबिंद सिंह के आदेश पर बाबा बंदा बहादुर ने मुगलों से लड़ने के लिए एक सेना बनाई थी। उन्‍होंने पंजाब के कुछ इलाकों में अपनी सत्‍ता कायम की। बाद में उन्‍हें कैद कर लिया गया। 1715 में उन्‍हें दिल्‍ली लाया गया। यहां उन्‍हें यातनाएं दी गईं और जनता के सामने मौत दे दी गई।

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आप सरकार का यह फैसला ऐसे वक्‍त में आया है, ज‍ब कुछ दिन पहले ही उसे अखबारों में फुल पेज का विज्ञापन देकर एलान किया था कि शहर के हर सरकारी स्‍कूल में पंजाबी भाषा को अनिवार्य कर दिया जाएगा। विज्ञापन के मुताबिक, हर स्‍कूल में कम से कम एक पंजाबी टीचर की मौजूदगी सुनिश्‍च‍ित की जाएगी और उनकी सैलरी भी बढ़ाई जाएगी। आलोचकों का मानना है कि पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आप सरकार पंजाबी वोटरों को लुभाने के लिए ये कदम उठा रही है। बता दें कि दिल्‍ली की आबादी का करीब 4 फीसदी हिस्‍सा सिखों का है।

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आम आदमी पार्टी को उम्‍मीद है कि वे पंजाब में अपनी लोकसभा चुनाव में मिली जीत को ही दोहराएंगे। आम चुनाव में पार्टी को 13 में से 4 सीटें मिली थीं। पार्टी ने यहां सीएम कैंडिडेट का एलान नहीं किया है। आप लीडर आशुतोष ने यह साफ कर दिया है कि अरविंद केजरीवाल दिल्‍ली नहीं जाएंगे। सत्‍ताधारी शिरोमणि अकाली दल तीसरी बार वापसी की आस में है। आप को यहां कांग्रेस से भी कड़ी टक्‍कर मिलने की उम्‍मीद है, जिसने कैप्‍टन अमरिंदर सिंह को दोबारा से राज्‍य का पार्टी प्रेसिडेंट बनाने का फैसला किया है।

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