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विधायक देवेंद्र सहरावत ने बढ़ाई आप की आफत

सहरावत कहते हैं कि आप केवल केजरीवाल की पार्टी तो है नहीं। इसे अण्णा हजारे, जस्टिस संतोष हेगड़े, शांति भूषण, एडमिरल रामदास से लेकर योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण जैसों ने मिलकर बनाया।

Author नई दिल्ली | September 8, 2016 1:10 AM
दिल्ली के बिजवासन से विधायक कर्नल देवेंद्र सेहरावत।

दिल्ली के बाद पंजाब जीतने की जुगत में लगी आम आदमी पार्टी (आप) का बवाल बढ़ता ही जा रहा है। दिल्ली के बिजवासन के बागी विधायक कर्नल (रि) देवेंद्र सहरावत को घेरने के लिए उनसे नाराज उनके पिता राम प्रकाश सहरावत के पुराने आरोप को सार्वजनिक करने के जवाब में उनके गांव महिपालपुर में हुई पंचायत ने इसे बड़ा मुद्दा बनाना तय किया है। कर्नल सहरावत को योजनाबद्ध तरीके से बदनाम करने के खिलाफ 10 सितंबर को नजफगढ़ की जाट धर्मशाला में दिल्ली देहात के गांवों की पंचायत बुलाई गई है।
कर्नल सहरावत पंजाब में आप की कमान संभालने वाले नेताओं पर लगाए गए यौन शोषण के आरोप पर अब भी कायम हैं। उनके मुताबिक, वे आप नेता संजय सिंह की मानहानि के मुकदमे का इंतजार कर रहे हैं। कर्नल तो दावा कर रहे हैं कि उनके पास हर आरोप के पुख्ता सबूत हैं।

कर्नल सहरावत के पुराने साथी और स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव के मुताबिक, उनके पिता से संबंध काफी दिनों से खराब हैं। विवाद को टालने के लिए ही वे काफी समय से महिपालपुर में ही अपने घर के पास किराए के घर में रहते हैं। उनके आरोपों को कर्नल सहरावत तो खारिज कर ही रहे हैं यादव ने भी उनकी मानसिक हालत ठीक न होने के आरोप को खारिज करते हुए बताया कि वे काफी समझदार हैं। भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ कर्नल ने किसान आंदोलन चलाया। वे रायसीना गांव (अब का राष्ट्रपति भवन) का इतिहास लिखने में लगे हुए हैं। रायसीना गांव की जमीन पर ही राष्ट्रपति भवन बना है।

पिछले दिनों दिल्ली सरकार के मंत्री रहे संदीप कुमार की सेक्स सीडी आने के बाद कर्नल सहरावत ने पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिख कर पंजाब में आप की कमान संभाल रहे नेताओं पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। उसके जवाब में अब तक पंजाब चुनाव संभाल रहे संजय सिंह ने मानहानि का मुकदमा दायर करने का दावा किया। पार्टी के नेता चाहे जो दावा करें लेकिन पार्टी भारी संकट में है। पंकज पुष्कर तो आप में होते हुए भी उसके खिलाफ काम कर रहे हैं। लेकिन सहरावत तो पार्टी में सक्रिय रहे। उनके बागी तेवर को भांपकर ही केजरीवाल सरकार में उन्हें शामिल नहीं किया गया। वे केजरीवाल के साथ ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के जमाने से साथ हैं। उन्होंने बाहरी दिल्ली के किसानों के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन चलाया। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का उन्हें तब से ही साथ मिला।

सहरावत कहते हैं कि आप केवल केजरीवाल की पार्टी तो है नहीं। इसे अण्णा हजारे, मेधा पाटकर, जस्टिस संतोष हेगड़े, पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, एडमिरल रामदास से लेकर योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण जैसों ने मिलकर बनाया।  उन्होंने कहा कि देश के इकलौते मुख्यमंत्री केजरीवाल हैं जिन्हें प्रधानमंत्री से जान का खतरा है। सवेरे से रात तक काम करने के बजाए प्रधानमंत्री काम नहीं करने दे रहे हैं जैसे आरोप लगाकर मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। पंजाब में आप नेताओं पर यौन शोषण के आरोप पर संजय सिंह के मानहानि के मुकदमे की धमकी पर उनका कहना था कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं। उनके पिता राम प्रकाश सहरावत ने केजरीवाल को पत्र लिख कर देवेंद्र सहरावत पर तंत्र-मंत्र करने और उनसे जान का खतरा होने का आरोप लगाया है। पत्र में यह भी कहा जा रहा है कि वे उनसे काफी पैसे के लिए दबाव डाल रहे हैं। उनके महिपालपुर गांव के लोगों ने बताया कि वे काफी समय से घर से अलग किराए के घर में रह रहे हैं। पैसे का विवाद भी काफी पुराना है। उनकी पत्नी बच्चों को पढ़ाने के लिए नोएडा में रहती हैं। देवेंद्र का आरोप है कि चुनाव में जो पैसे लगे वे अपने हिस्से के किराए से चुकाना चाहते हैं। लेकिन उनके पिता उन्हें उनका हिस्सा नहीं दे रहे हैं।

उनके खिलाफ चुनाव लड़े कांग्रेस नेता विजय लोचव भी राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद उनकी बातों का समर्थन करते हैं। फौज में कर्नल और आइआइएम, हैदराबाद से पढ़े कर्नल सहरावत ने पहले भी इस मुद्दे पर गांव में पंचायत की थी। लेकिन गांव के लोगों ने घर के विवाद में ज्यादा हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। बुधवार दस बजे फिर पंचायत हुई। उसमें पिता के साथ-साथ आप से प्रताड़ित होने का मुद्दा उठाया। पिता के पुराने आरोप को नए सिरे से उठाने को आप की साजिश बताया गया। गांव के लोगों ने इस मुद्दे पर दस सितंबर को नजफगढ़ की जाट धर्मशाला में दिल्ली देहात के सभी गांवों की पंचायत बुलाना तय किया गया। बिरादरी इसे अपने अपमान से जोड़ रही है। दिल्ली के जाटों का पंजाब के अनेक जाट सिख परिवारों से सीधा संबंध है। ऐसे में देवेंद्र सहरावत का विद्रोह आप के लिए परेशानी बन सकता है।

अब जो आप बची है उसमें केजरीवाल को चुनौती देने की किसी नेता की हैसियत नहीं है। लेकिन दिल्ली की सरकार में आने के डेढ़ साल बाद भी आप के नेता कुछ ठोस करने के बजाए प्रधानमंत्री काम नहीं करने दे रहे हैं का रोना रो कर समय निकाल रहे हैं, इससे पार्टी नेताओं में बेचैनी है। उन्हें लगता है कि इस तरह से वे दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। संसदीय सचिव बनाए गए 21 विधायकों की सदस्यता खतरे में है। चुनाव आयोग किसी दिन अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेज देगा। रिश्वत लेने के आरोप में मंत्री से हटाए गए असीम अहमद खान पार्टी से नाराज हैं ही। दो विधानसभा और दक्षिणी दिल्ली से एक लोक सभा चुनाव लड़ने वाले देवेंद्र सहरावत की तरह ही अनेक आप विधायक आप से निकाले गए स्वराज्य अभियान के नेताओं के संपर्क में हैं। वे भले ही खुलकर सामने न आएं लेकिन वे भी मानते हैं कि जिन वादों के साथ आप बनी और चुनाव जीती, वह अब कहीं नहीं दिख रही है। वे निजी बातचीत में ऐसा बोलते भी हैं। उन्हें बगावत करने के अवसर की तलाश है। अगर दस की पंचायत को जाट बिरादरी ने प्रतिष्ठा से जोड़ लिया तो आप के लिए मुसीबत और बढ़ जाएगी।
मोर्चे पर सहरावत

’आप केवल केजरीवाल की पार्टी तो है नहीं। इसे अण्णा हजारे, मेधा पाटकर, जस्टिस संतोष हेगड़े, पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, एडमिरल रामदास से लेकर योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण जैसों ने मिलकर बनाया।  ’देश के इकलौते मुख्यमंत्री केजरीवाल हैं जिन्हें प्रधानमंत्री से जान का खतरा है। सवेरे से रात तक काम करने के बजाए प्रधानमंत्री काम नहीं करने दे रहे हैं जैसे आरोप लगाकर मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। ’पंजाब में आप नेताओं पर यौन शोषण के आरोप पर संजय सिंह के मानहानि के मुकदमे की धमकी पर उनका कहना था कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं।

 

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