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आम आदमी पार्टी जल्द दिखाएगी तोमर को बाहर का रास्ता

आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर का अब तक हर स्तर पर बचाव करती आ रही पार्टी अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकती है। पार्टी की इस मामले को लेकर हो रही किरकिरी और साफ-सुथरी राजनीति के लिए झाड़ू लेकर कीचड़...
Author June 16, 2015 11:52 am
आप नेताओं ने दावा किया कि एक नजर में बिल्कुल भी नहीं लगता कि कोई गड़बड़ी है। शायद इसी का फायदा उठाते हुए तोमर पार्टी के अंधेरे में रखने में सफल हो पाए।

प्रतिभा शुक्ल

आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर का अब तक हर स्तर पर बचाव करती आ रही पार्टी अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकती है। पार्टी की इस मामले को लेकर हो रही किरकिरी और साफ-सुथरी राजनीति के लिए झाड़ू लेकर कीचड़ में उतरी पार्टी नैतिकता के आधार पर मंथन कर रही है। संभवत: पार्टी सख्त फैसला लेते हुए तोमर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता खारिज कर उन्हें बर्खाश्त कर सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तोमर को अब तक दी जा रही कानूनी सहायता भी पार्टी ने बंद कर दी है। माना जा रहा है कि तोमर ने पार्टी को भी कई स्तर पर गुमराह किया है और यही बात पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को सबसे ज्यादा परेशान कर ही है।

यों तो दागी नेता हर पार्टी में हैं पर साफ राजनीति के लिए मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी से लोगों की अपेक्षाए ज्यादा बड़ी हैं। पार्टी की पहली नैतिक जिम्मदारी उस मूल भावना को बचाने की है जो पार्टी के जन्म का आधार है। इसीलिए पार्टी इस दिशा में तेजी से विचार कर रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी में तोमर को टिकट देने को लेकर शुरू से ही विवाद था। तब आप के बागी प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने भी इसका विरोध किया था। लेकिन तब पार्टी ने उनकी नहीं सुनी थी। क्योंकि जब भी फर्जी डिग्री का मामला आया तोमर ने पार्टी के समाने डिग्रियां पेश कर दीं।

पार्टी के सूत्रों बताया कि वे डिग्रियां गड़बड़ हैं यह कभी नहीं लगा। इसकी पुष्टि के तौर पर उन्होंने आरटीआइ तक पेश किए। तमाम डिग्रियां लाकर दिखाईं। साथ ही दावा किया कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश की जा रही है। पार्टी ने तब उनकी बातों पर न केवल यकीन किया बल्कि उनको कानूनी सहायता भी मुहैया कराई गई थी। लेकिन तोमर की गिरफ्तारी और उसके बाद के घटनाक्रम को देखते हुए पार्टी ने अब और फजीहत न झेलने का फैसला किया है। और मामले को अांतरिक लोकपाल के सुपुर्द कर दिया है। पार्टी की मौजूदा आंतरिक लोकपाल समिति में पूर्व आइपीएस अधिकारी एन दिलीप कुमार, शिक्षाविद् एसपी वर्मा और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक राकेश सिन्हा शामिल हैं। वे पूरे मामले की पड़ताल कर रहे हैं। जैसे ही आंतरिक लोकपाल समिति अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।

आप नेताओं ने दावा किया कि एक नजर में बिल्कुल भी नहीं लगता कि कोई गड़बड़ी है। शायद इसी का फायदा उठाते हुए तोमर पार्टी के अंधेरे में रखने में सफल हो पाए। पहली बार के चुनाव में आप ने व्यापक स्क्रीनिंग करके टिकट देने का दावा किया था। तब पार्टी ने ऐन चुनाव के वक्त भी अपने कुछ उम्मीदवारों के टिकट काट कर साफ-सुथरी राजनीति की दलील पेश की थी। लेकिन दुबारा चुनाव के समय पार्टी टिकट बंटवारे को लेकर काफी विवादों में रही। यह आरोप भी लगे थे कि पार्टी ने इस बार बिना स्क्रीनिंग के टिकट देने का फैसला कई मामलों में किया।

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