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डूसू अध्यक्ष पद के 36 उम्मीदवारों ने किया नामांकन

एबीवीपी के दिल्ली प्रदेश मंत्री भरत खटाना के मुताबिक, मंगलवार को हम डूसू चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी करेंगे।
Author नई दिल्ली | September 5, 2017 03:28 am
दिल्ली विश्वविद्यालय।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन था। नामांकन के लिए सभी छात्र संगठनों की ओर से काफी संख्या में उम्मीदवार पहुंचे। डूसू चुनाव समिति के मुताबिक, अध्यक्ष पद के लिए 36 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है, जबकि उपाध्यक्ष के लिए 26, सचिव के लिए 36 और संयुक्त सचिव के लिए 27 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है।

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक, बुधवार दोपहर 12 बजे तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं, जिसके बाद उसी दिन शाम 6 बजे अंतिम रूप से बचे उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। इसके बाद ही छात्र संगठन अंतिम रूप से चुनाव मैदान में उतरने वाले अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हैं। 12 सितंबर को दो पालियों में मतदान होगा।

एबीवीपी ने 7 उम्मीदवारों का नामांकन कराया
डूसू चुनाव के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सात उम्मीदवारों का नामांकन कराया है। इनमें उत्तरी परिसर से अखिल चौधरी, सुधीर डेढ़ा और महामेधा नागर, दक्षिण परिसर से अंविक बैसोया और कालकाजी क्षेत्र से रजत चौधरी व उमाशंकर शामिल हैं। एबीवीपी के दिल्ली प्रदेश मंत्री भरत खटाना के मुताबिक, मंगलवार को हम डूसू चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी करेंगे। इसके लिए प्रेस क्लब आॅफ इंडिया में दोपहर 12 बजे प्रेस कांफ्रेंस की जाएगी, जिसमें एबीवीपी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी विनय बिद्रे मौजूद रहेंगे।
आइसा ने की उम्मीदवारों की घोषणा
आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने डूसू चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। आइसा ने सत्यवती कॉलेज सांध्य में पढ़ने वाली तीसरे वर्ष की छात्रा पारुल चौहान को अध्यक्ष पद के लिए, उत्तरी परिसर में पढ़ने वाले आदित्य वैभव को उपाध्यक्ष पद के लिए, किरोड़ीमल कॉलेज की जयश्री को सचिव पद के लिए और लॉ संकाय के आकाश गुप्ता को संयुक्त सचिव पद के लिए मैदान में उतारा है। पारुल का कहना है कि पिछले कुछ सालों से डूसू चुनाव धनबल और बाहुबल दिखाने का मंच बन चुका है। इसके लिए एबीवीपी और एनएसयूआइ पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हम आम छात्रों के लिए छात्रावासों, कमरा किराया कानून आदि के लिए लड़ते रहे हैं और आगे भी अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। पारुल ने कहा कि आम छात्रों की मांगों के लिए एबीवीपी और एनएसयूआइ कोई लड़ाई नहीं कर रहे हैं।

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