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राहत की राह पर: नेपाल में फंसे तीर्थयात्रियों में से 300 निकाले गए

बर्फबारी और भारी बारिश के कारण नेपाल के दुर्गम इलाकों में फंसे कैलाश-मानसरोवर के यात्रियों को निकालने का अभियान जारी है। नेपाल के हिलसा पहाड़ी क्षेत्र से आज करीब 200 मानसरोवर तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया।

Author नई दिल्ली, 4 जुलाई। | July 5, 2018 6:23 AM
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि फंसे हुए लोगों को निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के मद्देनजर दूतावास चार्टर्ड हेलीकॉप्टरों की सेवा लेने की भी संभावना तलाश रहा है।

बर्फबारी और भारी बारिश के कारण नेपाल के दुर्गम इलाकों में फंसे कैलाश-मानसरोवर के यात्रियों को निकालने का अभियान जारी है। नेपाल के हिलसा पहाड़ी क्षेत्र से आज करीब 200 मानसरोवर तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अन्य 119 लोगों को सिमिकोट इलाके से सुरखेत पहुंचाया गया। मानसरोवर की यात्रा से लौट रहे 1500 तीर्थयात्री नेपाल के नेपालगंज-सिमिकोट-हिलसा सेक्टर में तीन जगहों पर फंस गए थे। इनमें से लगभग छह सौ से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाली सेना से हेलिकॉप्टर की सेवाएं ली हैं, जिनसे यात्रियों को निकाले जाने का अभियान चलाया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने राहत और बचाव अभियान में नेपाल को सहयोग की पेशकश की है। सुरक्षित निकाले गए सभी तीर्थयात्रियों को नेपालगंज के रास्ते से होकर सड़क मार्ग से लखनऊ लाया जा रहा है। राहत और बचाव अभियान में नेपाल सरकार ने अपने हेलिकॉप्टर और विमान लगा रखे हैं। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी विभिन्न जगहों पर तैनात किए गए हैं, जो यात्रियों के संपर्क में हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय मिशन नेपालगंज-सिमिकोट-हिलसा सेक्टर पर स्थिति पर नजर रख रहा है और इलाके से फंसे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों को निकालने के लिए सभी मुमकिन उपाय कर रहा है। बुधवार को हिलसा-सिमिकोट सेक्टर में नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों ने 35 उड़ानें भरीं और करीब 200 लोगों को हिलसा से सिमिकोट पहुंचाया।

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि फंसे हुए लोगों को निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के मद्देनजर दूतावास चार्टर्ड हेलीकॉप्टरों की सेवा लेने की भी संभावना तलाश रहा है। ये मौसम की स्थिति और हेलीकॉप्टरों की इन मार्गों पर उड़ने की क्षमता पर निर्भर करेगा। हिलसा में ढांचागत सुविधाएं नहीं है जबकि सिमीकोट में यात्रियों को उतारने, संचार और चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। इस कारण यात्रियों को पहले हिलसा से सिमीकोट ले जाया जा रहा है, फिर सिमिकोट से सुरखेत। वहां से उन सभी को बसों से नेपालगंज रवाना किया जा रहा है।

भारत सरकार ने यात्रियों को लखनऊ तक पहुंचाने के लिए पांच वाणिज्यिक उड़ानों की सेवाएं ली हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि पांच वाणिज्यिक उड़ानों और नेपाल सेना के तीन हेलीकॉप्टर ने आज 119 लोगों को सिमिकोट से सुरखेत पहुंचाया। दूतावास ने लोगों को सुरखेत से नेपालगंज पहुंचाने के लिए बसों का भी इंतजाम किया है। मंगलवार को 1500 तीर्थयात्रियों में से करीब 250 को हिलसा से सुरक्षित निकाला गया था। इनमें से कुल 158 लोगों को सिमीकोट से निकालकर नेपालगंज लाया गया। नेपालगंज आधुनिक सुविधाओं से लैस बड़ा शहर है और सड़क मार्ग से वहां से लखनऊ तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है।

दूतावास ने तीर्थयात्रियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए पहले ही हॉटलाइन बना दी है जिसमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषी कर्मचारी भी हैं। भारतीय दूतावास ने बताया कि सोमवार को सिमीकोट में अत्यधिक ऊंचाई में ऑक्सीजन की कमी से केरल के 56 वर्षीय लीला नारायणन मंद्रीदथ और तिब्बत में दिल के दौरे से आंध्र प्रदेश की सत्या लक्ष्मी की मौत हो गई। उनके शव विशेष हेलीकॉप्टरों से काठमांडो और नेपालगंज लाए गए।

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