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1984 सिख विरोधी दंगे: बंद किए गए 186 मामले दोबारा खुलेंगे, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्‍यीय SIT करेगी जांच

तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों से संबंधित इन मामलों की जांच बंद कर दी गई थी।

passive Euthanasia, Suprme court, passive Euthanasia is permissible, sc allows euthanasia, sc on passive euthanasia, इच्छा मृत्यु, हिन्दी न्यूज, Hindi news, news in Hindi, Jansattaतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस के लिए ताशी)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 जनवरी, 2017) को साल 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित 186 मामलों की जांच दोबारा किए जाने का निर्देश दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की खबर के अनुसार दंगों की जांच के लिए हाईकोर्ट के पूर्व जजों की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय नए विशेष जांच दल का गठन किया जाएगा। दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों से संबंधित इन मामलों की जांच बंद कर दी गई थी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस प्रस्तावित समिति में पुलिस का एक सेवानिवृत्त और एक कार्यरत अधिकारी शामिल किया जाएगा।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सेवानिवृत्ति के समय पुलिस उपमहानिरीक्षक से नीचे के पद पर नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके द्वारा नियुक्त समिति ने 241 मामलों में से 186 मामलों को जांच के बगैर ही बंद कर दिया गया। न्यायालय ने समिति द्वारा पेश रिपोर्ट का अवलोकन किया, जिसे चमडे के बाक्स में पेश किया गया था। इस बाक्स में ताले की नंबर वाली प्रणाली है।

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