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5 महीने तक एम्‍स में फर्जी डॉक्‍टर बना रहा अदनान खुर्रम, दवाओं की नॉलेज देख पुलिस भी हैरान

आरोपी की पहचान मूलरूप से बिहार निवासी अदनान खुर्रम के रूप में हुई है। वह फिलहाल दिल्ली में जामिया नगर के पास बाटला हाउस में रहता है। 19 वर्षीय आरोपी के बारे में एम्स रेसिडेंट डॉक्टर्स ने बताया कि आरोपी के पास डॉक्टरों को जारी की जाने वाली एक खास डायरी भी थी। चूंकि खुर्रम पूछताछ में बार-बार अपने बयान बदल रहा है, लिहाजा अभी तक मामले के पीछे की सच्चाई सामने नहीं आ सकी है।
नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में अदनान पांच महीनों तक डॉक्टर होने का नाटक करता रहा। वह आमतौर पर लैब कोट में घूमता था। (फोटोः इंस्टाग्राम)

नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक युवक फर्जी डॉक्टर बना रहा। पांच महीनों तक उसने अपनी असली पहचान छिपा कर रखी थी। मेडिकल साइंस के छात्रों और उनसे संबंधित विभागों में उसने अपनी दोस्ती-यारी भी अपने झूठ के कारण बढ़ा रखी थी। यही नहीं, वह खुद को डॉक्टर बताकर मेडिकल कार्यक्रमों और सेमिनारों में भी हिस्सा लेता था। शनिवार (14 अप्रैल) को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। जांच-पड़ताल में पुलिस को जब उसकी दवाओं, एम्स के डॉक्टरों और वहां के विभागाध्यक्षों की जानकारी के बारे में पता लगा तो वह भी हैरान रह गई।

आरोपी की पहचान मूलरूप से बिहार निवासी अदनान खुर्रम के रूप में हुई है। वह फिलहाल दिल्ली में जामिया नगर के पास बाटला हाउस में रहता है। 19 वर्षीय आरोपी के बारे में एम्स रेसिडेंट डॉक्टर्स ने बताया कि आरोपी के पास डॉक्टरों को जारी की जाने वाली एक खास डायरी भी थी। चूंकि खुर्रम पूछताछ में बार-बार अपने बयान बदल रहा है, लिहाजा अभी तक मामले के पीछे की सच्चाई सामने नहीं आ सकी है।

फर्जी तरीके से पांच महीनों तक डॉक्टर बनने के पीछे उसने एक परिवार की मदद करने का उद्देश्य बताया। उसका कहना था कि वह ऐसा कर उस परिवार के बीमार शख्स का जल्द से जल्द इलाज कराना चाहता था। वहीं, अन्य कारण में उसने दावा किया कि उसे डॉक्टरों के साथ वक्त बिताना अच्छा लगाता है, लिहाजा उसने ऐसा किया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (दक्षिण) रोमिल बनिया ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 और 468 के तहत उस पर हौज खास पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है।

आरडीए अध्यक्ष हरजीत सिंह ने कहा कि खुर्रम उनकी गतिविधियों पर कुछ महीनों से लगातार नजर बनाए हुए थे। उनके अनुसार, वह हर वक्त लैब कोट पहनकर और स्टेथोस्कोप लेकर घूमता था। वह विभिन्न डॉक्टरों से अलग-अलग दावे करता था। एम्स में तकरीबन 2000 रेजिडेंस डॉक्टर हैं, लिहाजा उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर एक-दूसरे को पहचानना बेहद कठिन है। खुर्रम ने बस इसी बात का फायदा उठाया।

शनिवार को डॉक्टरों ने मैराथन का आयोजन किया था, जिसमें कुछ डॉक्टरों से पहचान-पत्र दिखाने के लिए कहा गया था। खुर्रम उन्हीं में से था, जो अपना पहचान पत्र नहीं दिखा सका, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि खुर्रम के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। सोशल मीडिया पर खुर्रम ने लैब कोट पहने हुए अपनी ढेर सारी तस्वीरें अपलोड कर रखी थीं।

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